Income Tax Rules: पति द्वारा पत्नी को गिफ्ट दिया गया पैसा टैक्स फ्री होता है। लेकिन अगर पत्नी इस पैसे को कहीं निवेश करती है, तो उस निवेश से मिली आय पति की इनकम में जुड़ जाती है।
Income Tax Rules: हितेश अपनी पत्नी को हर महीने 10 हजार रुपये गिफ्ट के रूप में ट्रांसफर करते हैं। उनकी पत्नी ऋचा इस पैसे की एसआईपी करा देती है। अब सवाल यह है कि इस एसआईपी से मिले रिटर्न पर टैक्स हितेश को भरना होगा या उनकी वाइफ ऋचा को? कपल्स के बीच अक्सर इस तरह के टैक्स से जुड़े सवाल आते रहते हैं। जागरुकता के अभाव में वे ठीक से अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग नहीं कर पाते और फिर बाद में पछताते हैं। आइए जानते हैं कि कानून क्या कहता है।
आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(vii) के तहत पत्नी को दिया गया गिफ्ट उनकी आयकर रिटर्न (ITR) में कर-मुक्त (Exempt) होता है। लेकिन अगर पत्नी गिफ्ट में मिले पैसे की एफडी करा लेती है या कहीं निवेश करती है, तो निवेश पर मिलने वाला रिटर्न धारा 64(1)(iv) के अनुसार पति की आय में जोड़ा जाएगा और पति को ITR में दिखाना होगा।
पति द्वारा पत्नी को दिये गए पैसे गिफ्ट या घरेलू खर्च के लिए माने जाते हैं। इस पैसे पर कोई टैक्स नहीं लगता। लेकिन अगर पत्नी इस पैसे को म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करती है या एसआईपी करती है, तो उस निवेश से मिला कैपिटल गेन या डिविडेंड क्लबिंग ऑफ इनकम नियम के तहत पति की टैक्सेबल आय में जुड़ जाता है। इस पर पति के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। ऐसे में पत्नी को इस आय पर अलग से टैक्स नहीं देना पड़ता।
लेकिन अगर पत्नी ने पति से मिले पैसे से किये गए निवेश से मिले रिटर्न को फिर से निवेश किया, तो उससे मिली इनकम पत्नी की मानी जाएगी और पत्नी को इस आय पर टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ेगा।
क्लबिंग ऑफ इनकम नियम में कुछ एक्सेप्शंस भी है। अगर पत्नी जॉब करती है और इनकम वह खुद जनरेट कर रही है, क्लबिंग नहीं होती। इसके अलावा पैसों का ट्रांसफर शादी से पहले या डिवोर्स के बाद हुआ है, तो भी क्लबिंग लागू नहीं होगी।
इसके अलावा घरेलू खर्च से बचत पर भी क्लबिंग लागू नहीं होती। जैसे पति ने पत्नी को घरेलू खर्च के लिए 25000 रुपये दिए। पत्नी ने इसमें से 5000 रुपये बचाकर एसआईपी में डाल दिए, तो यह बचत पत्नी की मानी जाएगी और इस निवेश से मिली आय पत्नी की ही होगी। लेकिन अगर पत्नी पूरे 25000 रुपये ही इन्वेस्ट कर देती है, तो क्लबिंग लागू होगी।
साथ ही, गिफ्ट से जुड़े प्रमाण (जैसे गिफ्ट डीड या बैंक ट्रांसफर का विवरण) सुरक्षित रखने चाहिए, ताकि आयकर विभाग द्वारा पूछताछ होने पर क्लबिंग को साबित किया जा सके। इस तरह आय पर केवल एक बार टैक्स लगेगा और बैंक रिकॉर्ड के अनुसार सही रिपोर्टिंग भी हो जाएगी।