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Iran Israel War: क्या सोमवार को क्रैश करने वाला है शेयर मार्केट? ईरान-इजराइल युद्ध से बदले कई समीकरण, एक्सपर्ट से समझिए

Iran Israel war Impact on stock market: मिडिल ईस्ट में संकट खतरनाक तरीके से बढ़ गया है। इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई है।

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Mar 01, 2026
शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। (PC: AI)

Iran Israel War: ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरानी मीडिया ने इस बात की पुष्टि की है। उधर ईरान द्वारा भी लगातार खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य बेसों पर हमले किये जा रहे हैं। इससे मिडिल ईस्ट में तनाव जबरदस्त तरीके से बढ़ गया है। इस भू-राजनीतिक संकट से निवेशक डरे हुए हैं। निवेशकों को चिंता है कि बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। आइए एक्सपर्ट्स से जानते हैं।

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शुक्रवार को आई थी बड़ी गिरावट

बीते हफ्ते शुक्रवार, 27 फरवरी को दोनों प्रमुख सूचकांक- सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1% की गिरावट के साथ बंद हुए। लगातार बने भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने बाजार की धारणा पर दबाव डाला। सेंसेक्स 961 अंक यानी 1.17% गिरकर 81,287.19 पर बंद हुआ था। जबकि निफ्टी-50 में 318 अंकों (1.25%) की गिरावट दर्ज हुई और यह 25,178.65 पर बंद हुआ। व्यापक बाजारों में भी दबाव रहा था। बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स 1.09% और बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स 0.86% गिरा।

रिलायंस ब्रोकिंग लिमिटेड के एसवीपी (रिसर्च) अजीत मिश्रा ने कहा, लगातार भू-राजनीतिक तनाव और टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी के कारण इक्विटी बाजार सप्ताह के अंत में दबाव में रहे थे। अब सोमवार को भी बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

इस हफ्ते कैसा रहेगा शेयर बाजार?

इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा के अनुसार, शनिवार को अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव में तेज बढ़ोतरी हुई, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा, “भारतीय इक्विटी बाजार में पहले ही जोखिम से बचने की प्रवृत्ति दिख रही है। बेंचमार्क सूचकांक कमजोर शुरुआत कर सकते हैं और अस्थिरता बढ़ सकती है। अल्पावधि में 1 से 1.5% तक की गिरावट संभव है। ऑटोमोबाइल, वित्तीय और एफएमसीजी सेक्टर में दबाव रह सकता है। जबकि आईटी और निर्यात आधारित कंपनियों को मजबूत डॉलर और वैश्विक जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति का लाभ मिल सकता है।”

शेयर बाजार को प्रभावित करेंगे ये फैक्टर

ईरान-इजराइल युद्ध

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने भी बता दिया है कि अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। शनिवार को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया है। इजराइल के दो अधिकारियों ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि खामेनेई की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजराइल की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे। बहरीन, कुवैत व कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने कहा कि कोई अमेरिकी हताहत नहीं हुआ, जबकि इजराइल ने बताया कि अधिकांश मिसाइलों को रोक लिया गया है।

कच्चे तेल की कीमतें

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-इजराइल के हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई से वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है और कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच सकती हैं। ईरान दुनिया के टॉप-10 तेल उत्पादक देशों में शामिल है। वर्तमान में वह लगभग 3.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन उत्पादन कर रहा है, जो पांच दशक पहले के उसके उच्चतम स्तर का लगभग आधा है।

शिनहान बैंक इंडिया के ट्रेजरी प्रमुख कुणाल सोधानी के अनुसार, भारत के कुल कच्चे तेल आयात (लगभग 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन) का लगभग 50% होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो भारत की आधी तेल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ेगा और वैश्विक कीमतों पर जोखिम प्रीमियम बढ़ेगा।

सोने और चांदी की कीमतें

मिडिल ईस्ट के ताजा घटनाक्रम से निवेशकों की अनिश्चितता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार खुलने पर सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश साधनों में तेजी आ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध की आशंका के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे कीमती धातुओं में ‘गैप-अप’ ओपनिंग देखने को मिल सकती है।

वैश्विक बाजार

लाइव मिंट की एक रिपोर्ट में रिलायंस ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा के हवाले से कहा गया कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा व्यापार से जुड़े घटनाक्रम के बीच वैश्विक बाजारों, खासकर अमेरिकी बाजार, की दिशा पर निवेशकों की नजर रहेगी। शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट रही थी। एसएंडपी-500 में 0.4% की गिरावट आई। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.1% गिरा था। वहीं, नैस्डैक कंपोजिट 0.9% फिसला था।

FII और DII एक्शन

कई महीनों की बिकवाली के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने फरवरी में भारतीय बाजार में खरीदारी की। अब तक एफआईआई ने सेकेंडरी मार्केट में लगभग 2.14 अरब डॉलर और प्राइमरी मार्केट में 299 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिससे कुल शुद्ध निवेश लगभग 2.44 अरब डॉलर हो गया है। यह सितंबर 2024 के बाद का सबसे बड़ा मासिक निवेश है। हालांकि, फरवरी के पहले पखवाड़े में एफआईआई ने आईटी शेयरों में 1.21 अरब डॉलर से अधिक की बिकवाली की थी। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के वीके विजयकुमार ने कहा, मिडिल ईस्ट के संघर्ष से बाजार में जोखिम की स्थिति बनी है। एफआईआई आगे निवेश से पहले स्थिति पर नजर रख सकते हैं।

टेक्निकल आउटलुक

निफ्टी अपने प्रमुख शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज (20, 50, 100 और 200-डे ईएमए) से नीचे फिसल गया है, जो कमजोरी का संकेत है। तात्कालिक सपोर्ट: 25,100 से 25,000 पर है। इसके नीचे जाने पर टार्गेट 24,900 से 24,700 है। रेजिस्टेंस: 25,350 से 25,500 है। आरएसआई लगभग 46 और MACD निगेटिव है। कुल मिलाकर रुख निगेटिव से रेंज-बाउंड है। बैंक निफ्टी 60,529 पर बंद हुआ और शॉर्ट-टर्म डबल-टॉप पैटर्न बना है। सपोर्ट 60,300 से 59,900 पर है। इसके नीचे जाने पर टार्गेट 59,700 से 59,500 है। रेजिस्टेंस 60,800 से 61,000 पर है। आरएसआई लगभग 52 पर है। रुख हल्का नकारात्मक है। वहीं, सेंसेक्स ने 81,200 से 81,000 का लेवल टेस्ट किया है। रेजिस्टेंस 82,000 से 82,500 पर है। निकट अवधि में सतर्कता जरूरी है।

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Published on:
01 Mar 2026 10:16 am
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