
US Iran War Bab el-Mandeb Houthis News: एक आफत अभी खत्म नहीं हुई और दूसरी दरवाजे पर दस्तक दे रही है। होर्मुज स्ट्रेट पहले से बंद पड़ा है। तेल के दाम आसमान पर हैं और अब खबर आ रही है कि ईरान यमन के हूती लड़ाकों को लाल सागर में एक बार फिर जहाजों पर हमले के लिए तैयार कर रहा है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने यूरोपीय अधिकारियों के हवाले से यह बात कही है। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया एक साथ दो समुद्री रास्तों पर संकट झेलेगी और यह स्थिति वैश्विक व्यापार के लिए उस से कहीं ज़्यादा खतरनाक होगी, जितना अभी बाजार सोच रहा है। पहले थोड़ा समझते हैं कि यह बाब-अल-मंदब क्या है।
बाब-अल मंदब अरबी भाषा का शब्द है। इसका अर्थ 'आंसुओं का दरवाजा' होता है। यह भी एक स्ट्रेट है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ती है। जो जहाज एशिया से यूरोप जाते हैं, उन्हें स्वेज नहर पहुंचने के लिए इसी रास्ते से जाना होता है। दुनिया का करीब 15 फीसदी समुद्री व्यापार इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। एशिया से यूरोप जाने वाले कंटेनर जहाज, खाड़ी देशों का तेल, भारत का निर्यात और आयात, सब इसी रास्ते से होता है। अगर यह बंद हुआ तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर यानी केप ऑफ गुड होप का लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। दो हफ्ते की देरी, ज़्यादा ईंधन, महंगा बीमा और बढ़े हुए माल भाड़े।
यह पहली बार नहीं होगा। साल 2023 से 2025 के बीच हूतियों ने 100 से ज्यादा जहाजों पर हमले किए थे। बड़ी शिपिंग कंपनियों ने लाल सागर छोड़ दिया था। उस वक्त भी भारी नुकसान हुआ था। लेकिन तब होर्मुज खुला था। अब होर्मुज पहले से बंद है। यानी इस बार दोनों रास्ते एक साथ बाधित हो सकते हैं।
सऊदी अरब ने होर्मुज की मुश्किल से निकलने का एक रास्ता निकाला है। वो अपने पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन के जरिए यनबू बंदरगाह से तेल भेज रहा है जो लाल सागर पर है। लेकिन यह रास्ता भी बाब-अल-मंदब से होकर जाता है। हूतियों ने अगर इस रास्ते को निशाना बनाया तो सऊदी अरब का यह विकल्प भी बंद हो जाएगा।
हूती अभी पूरी तरह मैदान में नहीं उतरे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक उनके अंदर मतभेद हैं कि कितनी आक्रामकता दिखाई जाए। अमेरिका और सऊदी अरब के अधिकारियों का मानना है कि हूती अभी अमेरिकी और सऊदी ठिकानों पर सीधे हमले से बच रहे हैं। 2025 में अमेरिकी हमलों की मार से उबरना भी बाकी है और यमन की आर्थिक हालत भी बुरी है।
लेकिन यूरोपीय अधिकारियों का कहना है कि जितना लंबा यह युद्ध चलेगा, उतनी ज़्यादा संभावना है कि हूती लाल सागर में हमले शुरू कर दें। यह एक टाइम बम की तरह है। ईरान के लिए यह सिर्फ सैन्य दांव नहीं है। यह एक मोलभाव का हथियार है। जब तक हूती के हमलों की संभावना बनी रहेगी, बाजार में डर बना रहेगा और ईरान की सौदेबाजी की ताकत बनी रहेगी।
भारत का यूरोप के साथ ज़्यादातर व्यापार लाल सागर और स्वेज नहर के रास्ते होता है। बाधा आई तो भारतीय निर्यातकों और आयातकों को अफ्रीका का लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। समय और पैसा दोनों बर्बाद होंगे। ऊपर से कच्चे तेल का मामला। होर्मुज पहले से बंद है और भारत मध्य-पूर्व से भारी मात्रा में तेल खरीदता है। अब अगर लाल सागर भी बाधित हुआ तो तेल और महंगा होगा। महंगाई बढ़ेगी, चालू खाते का घाटा बढ़ेगा और रुपया और कमज़ोर होगा। रिफाइनरी कंपनियां, एयरलाइंस और ट्रांसपोर्ट सेक्टर सबसे पहले झटका खाएंगे।
तेल बाज़ार अभी डी-एस्केलेशन यानी तनाव कम होने की उम्मीद पर टिका हुआ है। लेकिन जमीन पर हालात उससे अलग हैं। जब तक होर्मुज पूरी तरह नहीं खुलता और हूती शांत नहीं बैठते, यह राहत बस कागजी है।