
Iran war damages: इमारतें गिरी हुई हैं, हवाई अड्डे तबाह हैं, 60 विमान बेकार हो गए हैं। लेकिन ईरान कह रहा है- हम झुकेंगे नहीं। युद्ध में तबाह हुए ईरान ने अब दुनिया के सामने हिसाब रखा है। सरकारी प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने रूसी समाचार एजेंसी RIA Novosti को बताया कि 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद से ईरान को अब तक करीब 270 अरब डॉलर का सीधा और अप्रत्यक्ष नुकसान हो चुका है। 270 अरब डॉलर की रकम वाकई बहुत बड़ी है।
तेल और गैस प्लांट्स को नुकसान हुआ। पेट्रोकेमिकल प्लांट को नुकसान पहुंचा। स्टील और एल्युमीनियम की फैक्ट्रियां प्रभावित हुईं। सैन्य ठिकाने नष्ट हुए। पुल, बंदरगाह, रेलवे लाइनों, विश्वविद्यालयों, रिसर्च सेंटर, बिजलीघर पानी साफ करने के प्लांट, अस्पताल, स्कूल और आम लोगों के घरों को भी नुकसान पहुंचा है। ईरानी सरकार ने साफ कह दिया है कि नुकसान का पूरा आकलन अभी चल रहा है और इसे ठीक करने में कई साल लगेंगे। प्रवक्ता ने यह भी माना कि सरकार के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह उन नागरिकों को मुआवजा दे सके जिनके घर बर्बाद हो गए।
ईरानी एयरलाइंस एसोसिएशन के सचिव मकसूद असदी समानी ने बताया कि युद्ध में 60 यात्री विमान बेकार हो गए, जिनमें से 20 पूरी तरह नष्ट हो गए। अभी देश में करीब 160 यात्री विमान ही उड़ान भर सकते हैं और उनमें से ज्यादातर दशकों पुराने हैं।
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण पुर्जे नहीं मिलते, रखरखाव मुश्किल है और ऊपर से नवरोज यानी ईरानी नव वर्ष की छुट्टियों में जो कमाई होनी थी, वह भी नहीं हुई। 40 दिनों के युद्ध में एयरलाइंस को 300 खरब रियाल यानी करीब 19 करोड़ डॉलर का घाटा हुआ है। तेहरान, तबरीज, उर्मिया और खुर्रमाबाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर रनवे, कंट्रोल टावर और हैंगर पर सीधे हमले हुए हैं।
ईरान के संयुक्त राष्ट्र दूत ने मंगलवार को कहा कि पांच क्षेत्रीय देशों ने अपनी जमीन से ईरान पर हमले होने दिए। इन देशों को हर्जाना देना होगा। इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाने का विचार भी सामने रखा है। यह मुआवजे का एक तरीका बताया जा रहा है। पाकिस्तान में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता में भी हर्जाने का मुद्दा उठा था और भविष्य की किसी भी बातचीत में यह अहम मांग रहेगी।
बाहर से देखें तो लगेगा कि ईरान घुटनों पर आ गया होगा। लेकिन अंदर से तस्वीर अलग है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले हफ्ते हुआ दो हफ्ते का युद्धविराम नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे अमेरिका और इजरायल को हथियार जुटाने और हमले की तैयारी का मौका मिल जाएगा। उन्होंने साफ लिखा, "या तो वे ईरान के अधिकार मानें, जिसमें होर्मुज पर हमारा नियंत्रण शामिल है या फिर युद्ध के लिए तैयार रहें।"
युद्ध की मार से अलग एक और जख्म है जो ईरानी जनता को रोज तड़पा रहा है। सात हफ्तों से ज्यादा समय से 9 करोड़ से ज्यादा ईरानियों का इंटरनेट बंद है। ईरान चेंबर ऑफ कॉमर्स के अफशीन कोलाही ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह बंदी हर दिन 8 करोड़ डॉलर यानी करीब 670 करोड़ रुपये का नुकसान कर रही है। उन्होंने कहा, "हम हर दिन चार B1 पुल खो रहे हैं। दो बिजलीघर खो रहे हैं और यह हम खुद अपने आप को कर रहे हैं।" हजारों कारोबार बंद हो गए। नौकरियां गईं। सरकार कह रही है कि उसके हाथ में कुछ नहीं, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल यह फैसला लेती है।