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Stock Market: करोड़ों डीमैट अकाउंट लेकिन ट्रेड कर रहे सिर्फ मुट्ठीभर लोग, जीरोधा CEO का बड़ा खुलासा

Retail Investors India: जीरोधा सीईओ नीतिन कामथ के मुताबिक भारत के 13 करोड़ निवेशकों में से सिर्फ 30 फीसदी ने ट्रेड किया और F&O टर्नओवर का 60-70 फीसदी हिस्सा केवल 1-2 फीसदी ट्रेडर्स से आता है जो बाजार की असली तस्वीर सामने रखता है।
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Apr 23, 2026
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प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: Pexels)

F&O market India: भारत में शेयर बाजार को लेकर एक धारणा बहुत तेजी से फैली है कि देश में लोग वित्तीय रूप से जागरूक हो रहे हैं और भारत में अधिकतर निवेशक अब फ्यूचर्स और ऑप्शंस यानी F&O में पैसा लगा रहे हैं। यह धारणा इसलिए मजबूत हुई क्योंकि डीमैट अकाउंट के आंकड़े तेजी से बढ़े, ब्रोकरेज कंपनियों के मुनाफे ऊंचे रहे और खबरें भी यही बता रही हैं कि रिटेल इन्वेस्टर्स की बाढ़ आ गई है। लेकिन जीरोधा के सीईओ नीतिन कामथ ने हाल ही में कुछ ऐसे आंकड़े सामने रखे हैं जो इस पूरी धारणा को पलट देते हैं।

चौंकाने वाले आंकड़ों ने बताया सच

कामथ ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर एक पोस्ट में बताया कि मार्च 2025 में सिर्फ करीब 30 लाख लोगों ने F&O में कोई ट्रेड किया। पूरे FY26 की बात करें तो केवल 20 लाख लोगों ने सिर्फ F&O में ट्रेड किया। अगर इसमें इक्विटी ट्रेडर्स को भी जोड़ा जाए तो यह संख्या करीब 64 लाख तक पहुंचती है।

अब इन आकड़ों पर विचार करें तो भारत में इस वक्त करीब 13 करोड़ यूनिक इन्वेस्टर्स हैं। इनमें से केवल 3.8 करोड़ निवेशक ही कैश और F&O मिलाकर एक्टिव रहे। मतलब साफ है कि केवल 30 फीसदी निवेशकों ने कोई भी ट्रेड किया। बाकी 70 फीसदी निवेशक सिर्फ नाम के लिए मार्केट में दर्ज हैं।

1-2 फीसदी लोगों के हाथ में पूरा खेल

इससे भी बड़ा और चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि पूरे F&O मार्केट का 60-70 फीसदी टर्नओवर केवल 1-2 फीसदी ट्रेडर्स से आता है। यानी बाजार जितना बड़ा दिखता है, उसकी असल ताकत मुट्ठीभर लोगों के हाथों में है। यही वजह है कि ब्रोकरेज कंपनियों की कमाई लगातार बनी हुई है, क्योंकि थोड़े से हाइपर-एक्टिव ट्रेडर्स बार-बार ट्रेड करके इंडस्ट्री को चला रहे हैं।

F&O है क्या, समझना जरूरी है

F&O यानी फ्यूचर्स और ऑप्शंस एक ऐसा सेगमेंट है जहां ट्रेडर किसी शेयर, इंडेक्स या कमोडिटी की भविष्य की कीमत पर दांव लगाता है। फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में तय तारीख पर तय कीमत पर खरीद-बिक्री होती है, जबकि ऑप्शंस में ट्रेडर को यह अधिकार मिलता है लेकिन बाध्यता नहीं। लीवरेज की वजह से छोटी रकम में बड़ी पोजिशन ली जा सकती है, लेकिन नुकसान भी उतना ही बड़ा हो सकता है।

Updated on:
23 Apr 2026 02:21 pm
Published on:
23 Apr 2026 02:21 pm