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Bank Death Claim Rules: परिवार को पैसा लेने में क्यों होती है परेशानी? जानिए पूरे नियम और आपका हक

death claim settlement: बैंक में नॉमिनी दर्ज होने का मतलब पैसे का मालिक होना नहीं है। नॉमिनी केवल ट्रस्टी होता है और असली हकदार कानूनी उत्तराधिकारी होते हैं। ओडिशा की घटना ने जागरूकता की इस बड़ी कमी को उजागर किया है।

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May 03, 2026
नॉमिनी होने के बाद भी बैंक के चक्कर लगाने पड़ते है। फोटो: पत्रिका

Bank Account After Death India: हाल ही में ओडिशा में हुई एक घटना ने बैंकिंग सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए है। एक भाई अपनी मृत बहन के खाते से पैसे नहीं निकाल पा रहा था, क्योंकि उसके पास जरूरी कागजात नहीं थे। इसके बाद उठाए गए कदम ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या बैंक जानबूझकर पैसे रोकते हैं या नियम इतने सख्त हैं? क्या लोगों को इसके बारे में सही जानकारी नहीं होती?

यह घटना अकेली नहीं है। देश में लाखों परिवार हर साल अपने किसी करीबी की मौत के बाद बैंक अकाउंट से पैसा निकालने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते हैं। और सबसे बड़ी गलतफहमी यह होती है कि नॉमिनी का नाम बैंक में दर्ज है तो पैसा मिलना आसान होगा। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह सोच आधी-अधूरी है और यही वह बात है जो न बैंक बताता है और न ही आम लोगों तक पहुंचती है।

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नॉमिनी और वारिस में है ये अंतर

लोगों में एक भ्रम अक्सर यह भी होता है कि नॉमिनी होना ही पैसे का असली मालिक होना है। लेकिन ऐसा नहीं है। गांधी लॉ एसोसिएट्स के पार्टनर राहील पटेल के मुताबिक, बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट की धारा 45ZA के तहत नॉमिनी बैंक से पैसा ले सकता है और इससे बैंक की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। लेकिन नॉमिनी सिर्फ पैसा लेने वाला होता है, पैसे का कानूनी वारिस नहीं। यानी कि नॉमिनी सिर्फ पैसे का संरक्षक या ट्रस्टी होता है। इसके बाद उत्तराधिकार कानून यानी सक्सेशन लॉ से तय होता है कि पैसे का असली हकदार कौन है या इसका कैसे बंटवारा किया जाए।

बैंक गलत है या सिस्टम?

ओडिशा की घटना (Viral Odisha incident) के बाद यही सवाल सबसे ज्यादा लोगों की जुबान पर है कि बैंक गलत है या सिस्टम? दरअसल, बैंक भावनाओं से नहीं, नियमों से चलते हैं। सही डॉक्यूमेंट मिलने, KYC और पहचान verify करने के बाद बैंक नॉमिनी को भुगतान कर देता है। लेकिन इसमें समस्या यहां आती है कि लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती और बैंक में ब्रांच स्तर पर जानकारी देने में बड़ी लापरवाही होती है। इससे लोगों को बार-बार बैंक के चक्कर काटने पड़ते है।

अगर नॉमिनी नहीं है तो क्या होगा?

कई मामलों में ऐसा होता है कि बैंक में किसी नॉमिनी का नाम ही नहीं होता या उसकी पहले ही मृत्यु हो जाती है। ऐसे मामलों में ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ता है। बैंक से पैसे लेने की प्रोसेस लंबी हो जाती है। कोर्ट से लीगल हेयर सर्टिफिकेट या सक्सेशन सर्टिफिकेट लेना होता है। पहचान और रिश्ते के मजबूत दस्तावेजों को दिखाना होता है।

मौत के बाद परिवार क्या करे?

  • सबसे पहले मृत्यु प्रमाण पत्र यानी डेथ सर्टिफिकेट लें, इसके बिना कोई भी क्लेम आगे नहीं बढ़ता।
  • बैंक को लिखित में सूचित करें और क्लेम रिक्वेस्ट शुरू करें
  • सभी अकाउंट और डिपॉजिट में नॉमिनी की जानकारी जांचें
  • नॉमिनी है तो KYC और क्लेम फॉर्म जमा करें
  • नॉमिनी नहीं है तो लीगल हेयर सर्टिफिकेट या सक्सेशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करें
  • पहचान और रिश्ते के सबूत तैयार रखें ताकि प्रक्रिया में देरी न हो।

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