
मिथोस’ AI से बढ़ा साइबर खतरा। फोटो: पत्रिका
एंथ्रोपिक (Anthropic) के नए एआइ मॉडल मिथोस (Mythos) ने दुनियाभर के वित्तीय जगत में खलबली मचा दी है। इस खतरे की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आइटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आरबीआइ और देश के प्रमुख बैंकों के साथ इमरजेंसी मीटिंग की, ताकि बैंकिंग सिस्टम को इस अदृश्य हमले से बचाया जा सके।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को मिथोस के संभावित खतरे को लेकर सतर्क रहने को कहा है। सरकार इस तकनीक से निपटने की तैयारी में जुटी है। यह एआइ मॉडल सॉफ्टवेयर को हैक करने में सक्षम है। वित्तीय संस्थाओं के फंड तक अपनी पहुंच बना सकता है और साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है, इसलिए पहले से ही कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार को डर है कि अगर हैकर्स ने इस एआइ का इस्तेमाल किया, तो वे बैंकों के सिस्टम में घुसकर सेंध लगा सकते हैं। इसलिए सरकार ने सभी बैंकों को तुरंत अपने सुरक्षा तंत्र मजबूत करने और आपस में मिलकर सूचना साझा करने का आदेश दिया है, ताकि आम जनता का पैसा और जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहे। मिथोस ने ऑपरेटिंग सिस्टम में कमियां ढूंढी जो पिछले 27 साल से किसी को पता नहीं थीं। यह एआइ इतना शक्तिशाली है कि हैकर सॉफ्टवेयर की कमजोरियां ढूंढ उनका गलत इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे में डिजिटल पेमेंट, लोन ऐप, निवेश प्लेटफॉर्म पर भी साइबर हमलों का खतरा बढ़ा है।
सरकार एक ऐसा ढांचा तैयार करने की योजना बना रही है जो एआइ के जरिए होने वाले हमलों को पहचान सके और उन्हें रोक सके। वित्त मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि बैंकों को इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर एक रियल-टाइम सिस्टम बनाना चाहिए। यानी जैसे ही किसी एक बैंक पर कोई खतरा दिखे, उसकी जानकारी तुरंत पूरे देश के बैंकिंग सिस्टम को मिल जाए।
भारत ही नहीं, अमरीका-यूरोप भी इस एआइ मॉडल से सहमे हैं। अमरीकी सरकार ने बैंकों से सुरक्षा को लेकर चर्चा की है। व्हाइट हाउस अब एजेंसियों को साइबर हमलों से बचाने के लिए खुद ही मिथोस के इस्तेमाल की योजना बना रहा है।
Published on:
25 Apr 2026 11:58 am
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