Anthropic: ओपन एआई की टॉप एग्जीक्यूटिव ने एक आंतरिक मेमो में प्रतिद्वंद्वी कंपनी एंथ्रोपिक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनका बिजनेस मॉडल डर पर आधारित है और उनकी कमाई के आंकड़े भी फर्जी हैं।
Rivalry: टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में इन दिनों भारी विरोध देखने को मिल रहा है। एआई की रेस में सबसे आगे चल रही कंपनी ओपनएआई और उसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी एंथ्रोपिक के बीच की खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। हाल ही में ओपनएआई की चीफ रेवेन्यू ऑफिसर , डेनिस ड्रेसर का एक कॉन्फिडेंशियल मेमो लीक हुआ है। अपने कर्मचारियों को लिखे इस पत्र में ड्रेसर ने एंथ्रोपिक की कार्यप्रणाली, उनकी विचारधारा और वित्तीय स्थिति पर करारा हमला किया है। यह मेमो ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों ही कंपनियां इस साल अपना-अपना आईपीओ लाने की तैयारी कर रही हैं।
लीक हुए मेमो के अनुसार, डेनिस ड्रेसर ने साफ तौर पर कहा है कि एंथ्रोपिक की पूरी ब्रांडिंग 'डर, पाबंदियों और इस विचार पर टिकी हुई है कि एआई का नियंत्रण केवल कुछ चुनिंदा एलीट लोगों के हाथों में होना चाहिए।' ओपनएआई का मानना है कि उनकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी सुरक्षा का हौवा खड़ा करके लोगों को डरा रही है। इसके विपरीत, ओपनएआई की नीति है कि तकनीकी रूप से शक्तिशाली और सुरक्षित सिस्टम बनाए जाएं और उन्हें अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि तकनीक का लोकतंत्रीकरण हो सके।
ड्रेसर का यह हमला केवल विचारधारा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने एंथ्रोपिक की कमाई के आंकड़ों को भी कटघरे में खड़ा किया। एंथ्रोपिक का दावा है कि उनका सालाना रेवेन्यू रन रेट 30 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। लेकिन ओपनएआई का आरोप है कि एंथ्रोपिक अपनी कमाई बढ़ा-चढ़ा कर दिखा रहा है और इसमें 8 बिलियन डॉलर का सीधा हेरफेर है। मेमो में कहा गया है कि एंथ्रोपिक अकाउंटिंग की चालाकी से अमेज़न और गूगल के साथ हुए करारों का 'ग्रॉस रेवेन्यू' दिखा रहा है, जबकि असल नेट रेवेन्यू काफी कम है। अगर सही आंकड़ों की बात करें तो एंथ्रोपिक का रेवेन्यू ओपनएआई के 24 बिलियन डॉलर के मुकाबले सिर्फ 22 बिलियन डॉलर ही बैठता है।
इसके साथ ही, ओपनएआई ने एंथ्रोपिक की रणनीतिक गलतियों को भी उजागर किया। ड्रेसर ने बताया कि एंथ्रोपिक ने भविष्य की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त कंप्यूटिंग पावर नहीं जुटाई है। इसका खामियाजा ग्राहकों को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें एंथ्रोपिक के सिस्टम में स्लो स्पीड और कमजोर उपलब्धता का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, ओपनएआई ने समय रहते इस जरूरत को भांप लिया और आज उनके पास एक मजबूत स्ट्रक्चरल फायदा है।
यह मेमो लीक होने के बाद पूरी टेक इंडस्ट्री में बवाल मच गया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आईपीओ लाने से पहले दोनों कंपनियां एंटरप्राइज मार्केट में खुद को नंबर वन साबित करने की होड़ में हैं। एंथ्रोपिक ने ओपनएआई के इन दावों और अकाउंटिंग में हेरफेर के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उनकी वित्तीय रिपोर्टिंग एकदम पारदर्शी है।
अब निवेशकों और टेक जगत की नजर इस बात पर है कि एंथ्रोपिक इस आक्रामक हमले का आधिकारिक रूप से क्या जवाब देता है। आने वाले कुछ महीनों में दोनों कंपनियों के बीच टैलेंट, क्लाइंट्स और क्लाउड पार्टनर्स को अपनी तरफ खींचने की जंग और भी तेज होने की पूरी संभावना है।
इस विवाद का एक दिलचस्प पहलू क्लाउड कंप्यूटिंग के दिग्गजों की भूमिका है। एंथ्रोपिक का बैकअप गूगल और अमेज़न के पास है, जबकि ओपनएआई लंबे समय से माइक्रोसॉफ्ट के साथ है। हालांकि, हाल ही में ओपनएआई ने अपनी ग्रोथ बढ़ाने के लिए अमेजन वेब सर्विसेज की तरफ भी रुख किया है, जिससे माइक्रोसॉफ्ट के साथ उनके रिश्तों को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।