
SIP Calculator: हर महीने अपनी सैलरी का एक हिस्सा इन्वेस्ट करने वाले निवेशकों के लिए मार्केट में कई इन्वेस्टमेंट ऑप्शन उपलब्ध हैं। इनमें म्यूचुअल फंड एसआईपी, आरडी और पीपीएफ प्रमुख हैं। एसआईपी में लॉन्ग टर्म तक इन्वेस्ट करके एक बड़ा फंड बनाया जा सकता है। लेकिन यहां मार्केट के उतार-चढ़ाव का जोखिम बना रहता है। वहीं, जो लोग इस जोखिम को लेना नहीं चाहते, वे पीपीएफ में इन्वेस्ट कर सकते हैं। यह एक सरकार समर्थित स्मॉल सेविंग स्कीम है। इसलिए यहां जोखिम नहीं के बराबर होता है। पीपीएफ की मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है। ऐसे में यहां भी अच्छा-खासा फंड तैयार किया जा सकता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, लॉन्ग टर्म में म्यूचुअल फंड एसआईपी से 12 फीसदी औसत सालाना रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। अगर 15 साल तक हर महीने 12,000 रुपये एसआईपी में डालते हैं, तो 12 फीसदी औसत सालाना संभावित रिटर्न के हिसाब से मैच्योरिटी पर 57,11,177 रुपये का फंड तैयार हो सकता है। ब्रोकरेज फर्म ग्रो के एसआईपी कैलकुलेटर के अनुसार, इसमें 21,60,000 रुपये आपकी निवेश राशि और 35,51,177 रुपये ब्याज आय होगी।
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| मासिक निवेश | ₹12,000 |
| सालाना संभावित रिटर्न | 12% |
| निवेश की अवधि | 15 साल |
| कुल निवेश राशि | ₹21,60,000 |
| अनुमानित ब्याज/रिटर्न | ₹35,51,177 |
| मैच्योरिटी पर कुल फंड | ₹57,11,177 |
पब्लिक प्रोविडेंट फंड में इस समय 7.1 फीसदी सालाना ब्याज दर ऑफर हो रही है। अगर आप यहां 12,000 रुपये महीने या 1,44,000 रुपये सालाना इन्वेस्ट करते हैं, तो 15 साल में 39,05,481 रुपये का फंड जमा हो जाएगा। यहां 21,60,000 रुपये आपकी निवेश राशि और 17,45,481 रुपये ब्याज आय होगी।
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| मासिक निवेश | ₹12,000 |
| सालाना निवेश | ₹1,44,000 |
| ब्याज दर | 7.1% |
| निवेश की अवधि | 15 साल |
| कुल निवेश राशि | ₹21,60,000 |
| ब्याज से कमाई | ₹17,45,481 |
| मैच्योरिटी पर कुल फंड | ₹39,05,481 |
ऊपर की गई कैलकुलेशन के अनुसार, एसआईपी में किये गए निवेश में 18,05,696 रुपये का ज्यादा फायदा हो सकता है। हालांकि, म्यूचुअल फंड एसआईपी का रिटर्न तय नहीं होता। इसलिए मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम का सटीक अनुमान लगाया नहीं जा सकता।
यहीं पर असली फर्क आता है। एसआईपी में 12 फीसदी रिटर्न कोई गारंटीड रिटर्न नहीं है। शेयर बाजार की परफॉर्मेंस के हिसाब से वास्तविक रिटर्न इससे कम या ज्यादा हो सकता है। दूसरी तरफ पीपीएफ में रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर नहीं रहता है। सरकार पीपीएफ की ब्याज दर तय करती है। इसलिए इसे अपेक्षाकृत स्टेबल और कम जोखिम वाला विकल्प माना जाता है। हालांकि, पीपीएफ की ब्याज दर भी समय-समय पर बदल सकती है, इसलिए 15 साल तक 7.1 फीसदी दर को स्थायी मानकर चलना जरूरी नहीं है।
अगर आपका मकसद लंबी अवधि में ज्यादा बड़ा फंड बनाने का है और आप बाजार के उतार-चढ़ाव को सह सकते हैं, तो एसआईपी ज्यादा रिटर्न की संभावना दे सकती है। वहीं, अगर आपकी पहली प्राथमिकता स्टेबिलिटी और कम जोखिम है, तो पीपीएफ आपके लिए बेहतर हो सकता है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)