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राजस्थान बजट के बाद भारत के किसी भी राज्य की गाड़ी के री-रजिस्ट्रेशन पर’बंपर छूट’!ऑटोमोबाइल व ट्रांसपोर्ट बाजार में खलबली, जानें दूसरे प्रदेशों के नियम

Road Tax Exemption: राजस्थान बजट 2026 में बड़ा ऐलान, दूसरे राज्यों से आने वाली गाड़ियों के री-रजिस्ट्रेशन पर रोड टैक्स में भारी छूट। जानिए नई दरें और नियम जो ट्रांसपोर्ट बिजनेस को बदल देंगे।

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Feb 11, 2026
गाड़ियों के री-रजिस्ट्रेशन पर रोड टैक्स में भारी छूट। ( फोटो: पत्रिका)

Transport Policy: भारत के किसी भी राज्य से आने वाली गाड़ी के री-रजिस्ट्रेशन पर राजस्थान में 'बंपर छूट'देने का प्रावधान किया गया है। राजस्थान सरकार ने अपने बजट 2026 (Rajasthan Budget 2026) में एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है, जिसकी पूरे देश के ऑटोमोबाइल और ट्रांसपोर्ट बाजार में चर्चा हो रही है। सरकार ने दूसरे राज्यों से राजस्थान में शिफ्ट होने वाले लोगों के लिए वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन (Vehicle Re-registration) पर रोड टैक्स में भारी छूट देने का ऐलान किया है। इस फैसले ने नौकरीपेशा लोगों, ट्रांसपोर्टरों और कंपनियों के लिए राजस्थान को 'सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन' बना दिया है।

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क्या है 'वन नेशन, लो टैक्स' का यह मॉडल?

आमतौर पर, जब आप अपनी कार या बाइक लेकर एक राज्य से दूसरे राज्य में बसते हैं, तो आपको वहां दोबारा रोड टैक्स (Road Tax) भरना पड़ता है, जो गाड़ी की कीमत का 8% से 18% तक हो सकता है। यह लाखों रुपये का बोझ होता है। राजस्थान सरकार ने इस बाधा को खत्म करते हुए प्रस्ताव दिया है कि अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों पर अब नाममात्र या रियायती दर पर टैक्स लगेगा। इसका सीधा असर यह होगा कि लोग अपनी पुरानी गाड़ियाँ बेचने के बजाय उन्हें साथ लाना पसंद करेंगे।

आखिर क्या है यह नई घोषणा? (The Big Move)

अब तक, अगर आप अपनी गाड़ी (Car/Bike) लेकर किसी दूसरे राज्य से राजस्थान में बसते थे, तो आपको वाहन की पुरानी कीमत (Depreciated Value) के हिसाब से मोटा रोड टैक्स चुकाना पड़ता था। लेकिन 2026 के बजट प्रस्ताव के अनुसार, अब यह टैक्स नाममात्र या बहुत रियायती दरों पर लगेगा। इसका सीधा मकसद दूसरे राज्यों के फ्लीट ओनर्स (Fleet Owners) और कॉरपोरेट कंपनियों को राजस्थान में अपनी गाड़ियां रजिस्टर कराने के लिए आकर्षित करना है।

री-रजिस्ट्रेशन पर टैक्स छूट और नियम

विषयपुराना नियम (Old Rule)राजस्थान बजट 2026 का प्रस्ताव
टैक्स गणनागाड़ी की वर्तमान उम्र और कीमत पर पूरा राज्य टैक्स लगता था।फ्लैट डिस्काउंट: पुराने वाहनों के प्रवेश पर टैक्स में विशेष प्रतिशत की छूट।
समय सीमा12 महीने के अंदर दोबारा रजिस्ट्रेशन जरूरी।प्रक्रिया को ऑनलाइन और तेज (Fast-track) किया जाएगा।
एनओसी (NOC)पिछले राज्य से एनओसी अनिवार्य।एनओसी की अनिवार्यता रहेगी, लेकिन टैक्स का बोझ कम होगा।
रिफंड क्लेमपुराने राज्य से टैक्स रिफंड लेना टेढ़ी खीर थी।रिफंड मिले न मिले, यहाँ देना कम पड़ेगा, जिससे दोहरा नुकसान नहीं होगा।

ट्रांसपोर्ट बिजनेस पर क्या होगा असर ?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से राजस्थान 'लॉजिस्टिक्स हब' बन सकता है। देश की बड़ी रेंटल कार कंपनियां (जैसे Zoomcar, Revv) और टैक्सी एग्रीगेटर्स (Ola/Uber) अब अपनी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन महाराष्ट्र या कर्नाटक की जगह राजस्थान में करवाना पसंद करेंगी, क्योंकि यहाँ लागत कम आएगी। इससे राज्य के राजस्व (Revenue) में भी बढ़ोतरी होगी।

देश के प्रमुख राज्यों में रोड टैक्स का तुलनात्मक ब्यौरा

राज्य (State)रोड टैक्स की औसत दर (गाड़ी की कीमत पर)स्थिति
कर्नाटक13% से 18% तकदेश में सबसे महंगा
महाराष्ट्र11% से 13% तकबहुत ज्यादा
तमिलनाडु10% से 15%ज्यादा
दिल्ली4% से 12.5% (ईंधन के आधार पर)मध्यम
हरियाणा6% से 10%औसत
हिमाचल/चंडीगढ़3% से 8%कम
राजस्थान (नया नियम)प्रस्तावित विशेष छूट (Re-registration पर)सबसे आकर्षक

राज्यों के बीच टैक्स वार का अंदेशा

बहरहाल, राजस्थान सरकार का यह कदम केंद्र की 'BH Series' (भारत सीरीज) नंबर प्लेट की सफलता के बीच राज्यों के बीच टैक्स वार (Tax War) छेड़ सकता है। अगर राजस्थान सस्ता रजिस्ट्रेशन देगा, तो पड़ोसी राज्यों (MP, गुजरात, हरियाणा) को भी अपनी दरें घटानी पड़ सकती हैं।

फाडा (FADA - डीलर्स एसोसिएशन): "यह कदम स्वागत योग्य है। इससे पुरानी गाड़ियों (Used Car Market) का बाजार राजस्थान में तेजी से बढ़ेगा और लोगों को सस्ती गाड़ियां मिलेंगी।"

ट्रांसपोर्ट यूनियन: "हम लंबे समय से 'एक देश, एक टैक्स' की मांग कर रहे थे। राजस्थान ने पहल की है, अब दूसरे राज्यों को भी जागना चाहिए।"

अब इससे संबंधित सुलगते सवाल

क्या यह छूट कमर्शियल वाहनों (Trucks/Buses) पर भी लागू होगी या सिर्फ निजी कारों पर?

छूट का सटीक प्रतिशत (Percentage) क्या होगा, इसका विस्तृत नोटिफिकेशन कब आएगा?

पड़ोसी राज्य हरियाणा और गुजरात इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं?

पुरानी गाड़ियों का नया ठिकाना ?

दिल्ली-एनसीआर में 10 और 15 साल पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध है। ऐसे में, राजस्थान की यह नई नीति उन महंगी लग्जरी कारों के लिए वरदान बन सकती है जो दिल्ली में बैन होने वाली हैं, लेकिन अभी फिट हैं। लोग अपनी गाड़ियां राजस्थान ट्रांसफर करवाकर कानूनी रूप से चला सकेंगे, वह भी कम खर्च में।

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