Startup News: डीटूसी, फिनटेक और एडवांस्ड मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों को आसानी से फंडिंग मिल रही है। स्केपिया का वैल्यूएशन 2.5 गुना बढ़ गया है।
Investment in startup: भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में इस समय एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जहां कुल फंडिंग का माहौल धीमा है, वहीं कुछ चुनिंदा मिड-स्टेज स्टार्टअप्स की वैल्यूएशन तेजी से बढ़ रही है। इससे साफ संकेत मिलता है कि निवेशक अब पहले की तरह हर कंपनी में पैसा नहीं लगा रहे, बल्कि केवल मजबूत ग्रोथ और बेहतर बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों को चुन रहे हैं। उदाहरण के तौर पर फूड डिलीवरी स्टार्टअप स्विस की वैल्यूएशन पिछले साल करीब 60 मिलियन डॉलर से बढ़कर अब 139 मिलियन डॉलर हो गई है। इसी तरह ट्रैवल फिनटेक स्टार्टअप स्केपिया की वैल्यूएशन 500 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो पहले करीब 200 मिलियन डॉलर थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब निवेशक खासकर उन सेक्टर्स पर ध्यान दे रहे हैं, जहां ग्रोथ साफ दिखाई दे रही है, जैसे डी-2-सी (डायरेक्ट-टू- कंज्यूमर), फिनटेक और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग। जिन कंपनियों की कमाई (टॉप लाइन) मजबूत है, उन्हें आसानी से निवेश मिल रहा है। 2025-26 में स्टार्टअप फंडिंग 23% घटकर 10.9 अरब डॉलर रह गई। निवेशकों का मानना है कि अब आसान फंडिंग का दौर खत्म हो चुका है। पहले जहां स्टार्टअप्स तेजी से 25-30% मासिक ग्रोथ दिखाते थे, अब यह घटकर करीब 20% रह गई है। ऐसे में कंपनियों को अब ज्यादा टिकाऊ और लाभदायक मॉडल पर ध्यान देना होगा।
स्केपिया की वैल्यूएशन 2.5 गुना बढ़ी है। इसके अलावा, स्नैबिट की 2.2 गुना, इमरजेंट की 3.3 गुना, सिम्प्लिफाई की 2 गुना, सही की 4.2 गुना, रोजाना की 2.5 गुणा, स्विस की 2.3 गुना, अन्वेषण की 2.3 गुना और प्रॉटो की वैश्यूएशन 2.2 गुना बढ़ी है
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