वैश्विक अनिश्चितता, कमजोर रुपया, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बजट से पहले सतर्कता के कारण शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। सेंसेक्स 800 अंक टूटने से निवेशकों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।
BSE Sensex Crashes: भारतीय शेयर बाजार में हाल के दिनों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। घरेलू और वैश्विक संकेतकों के बीच निवेशक असमंजस की स्थिति में हैं। आज शुक्रवार को कारोबार के दौरान सेंसेक्स में करीब 800 अंकों की तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई और बाजार में डर का माहौल बन गया। बीएसई सेंसेक्स 769 अंकों की गिरावट के साथ 81,537 अंक पर बंद हुआ।
शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति, भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आ रहे मिले-जुले संकेतों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड से जुड़े घटनाक्रमों के कारण वैश्विक बाजारों में दबाव देखने को मिला, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा। विदेशी बाजारों में कमजोरी आते ही घरेलू निवेशकों ने भी सतर्क रुख अपनाया और बिकवाली बढ़ गई।
डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी ने भी बाजार की गिरावट को तेज किया। 91.99 रुपये प्रति डॉलर की कमजोरी के कारण आयात लागत बढ़ने की आशंका पैदा होती है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की स्थिति और बिगाड़ दी। जनवरी महीने में विदेशी निवेशकों ने बड़ी मात्रा में शेयर बेचे, जिससे बाजार पर नकारात्मक दबाव बना रहा। विदेशी पूंजी के बाहर जाने से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली।
केंद्रीय बजट से पहले निवेशक आमतौर पर सतर्क हो जाते हैं और जोखिम लेने से बचते हैं। इस बार भी बजट को लेकर कई तरह की अटकलें बाजार में रहीं। निवेशकों को आशंका है कि सरकार के पास खर्च बढ़ाने की सीमित गुंजाइश हो सकती है। इसी कारण कई निवेशकों ने पहले से कमाए गए मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए मुनाफावसूली की। इसके अलावा तिमाही नतीजों में उम्मीद के मुताबिक मजबूती न दिखने से भी बाजार की धारणा कमजोर हुई और बिकवाली का दबाव बढ़ा।