
Stock Market Today: लगातार चौथे दिन भारतीय शेयर बाजार बढ़त लेकर बंद हुआ है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 0.45 फीसदी या 347 अंक की बढ़त लेकर 77,155 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी 0.40 फीसदी या 96.55 अंक की बढ़त के साथ 24,085 पर बंद हुआ। बाजार बंद होते समय मेंसेक्स के 30 शेयरों में से 21 शेयर हरे निशान पर और 9 शेयर लाल निशान पर थे।
सेक्टोरल सूचकांकों की बात करें, तो आज सबसे अधिक तेजी निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 2.11 फीसदी दर्ज हुई। इसके अलावा, निफ्टी आईटी में 0.85 फीसदी, निफ्टी मेटल में 1.01 फीसदी, निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.75 फीसदी, निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम में 0.23 फीसदी और निफ्टी सीमेंट में 0.55 फीसदी की तेजी दर्ज हुई। वहीं, सबसे अधिक गिरावट निफ्टी ऑटो में 0.62 फीसदी दर्ज हुई। इसके अलावा, निफ्टी एफएमसीजी में 0.17 फीसदी, निफ्टी मीडिया में 0.04 फीसदी, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.08 फीसदी, निफ्टी रिटल्टी में 0.43 फीसदी और निफ्टी हेल्थकेयर में 0.19 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।
इस वीक दो ऐसे नाम IPO की दौड़ में उतर सकते हैं, जो भारतीय पूंजी बाजार की तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं। एक तरफ मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो है, तो दूसरी तरफ देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज एनएसई। दोनों कंपनियां मिलकर करीब 6 अरब डॉलर जुटाने की तैयारी में हैं। बाजार के जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ दो IPO नहीं होंगे, बल्कि 2026 में भारतीय प्राइमरी मार्केट के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकते हैं।
निवेशकों की नजर सबसे ज्यादा रिलायंस जियो पर टिकी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी करीब 4 अरब डॉलर के आईपीओ के लिए जल्द ही सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर जमा कर सकती है। संभावना है कि यह कदम रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक आम बैठक (AGM) से ठीक पहले उठाया जा सकता है। मुकेश अंबानी ने पिछले साल शेयरधारकों से वादा किया था कि 2026 की पहली छमाही में जियो को शेयर बाजार में लाया जाएगा। हालांकि, अब यह टार्गेट थोड़ा पीछे खिसकता दिखाई दे रहा है। इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला है और कंपनी के रिफाइनिंग कारोबार को मिडिल ईस्ट के तनाव का असर झेलना पड़ा है।
4 अरब डॉलर का यह IPO आता है, तो यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा IPO बन सकता है। अभी यह रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया के 3.3 अरब डॉलर के इश्यू के नाम है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस जियो ने अपने आईपीओ की संरचना में भी बदलाव किया है। पहले इसे ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में लाने की योजना थी, लेकिन निवेशकों के साथ वैल्यूएशन को लेकर मतभेद के बाद अब इसे पूरी तरह फ्रेश इश्यू के तौर पर लाने पर काम किया गया है। इसका मतलब है कि आईपीओ से जुटाई गई राशि सीधे कंपनी के पास जाएगी।
जियो के बाद सबसे बड़ा नाम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का है। NSE के IPO का इंतजार बाजार पिछले कई वर्षों से कर रहा है। नियामकीय अड़चनों और पुराने कानूनी विवादों के कारण इसकी लिस्टिंग लगातार टलती रही है। अब संकेत मिल रहे हैं कि NSE भी इसी सप्ताह सेबी के पास अपना आईपीओ आवेदन दाखिल कर सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एनएसई का बिजनेस मॉडल काफी मजबूत है। एक्सचेंज को ज्यादा पूंजी निवेश की जरूरत नहीं पड़ती और अपने सेक्टर में इसकी पकड़ बेहद मजबूत है। हालांकि, इसकी कमाई का बड़ा हिस्सा डेरिवेटिव ट्रेडिंग से आता है, इसलिए नियामकीय बदलावों का असर इसकी आय पर पड़ सकता है।