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Strait of Hormuz पर क्या ईरान वसूल सकता है टोल? जानिए इससे दुनिया पर क्या होगा असर

Iran US war update: ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने और IRGC की मंजूरी अनिवार्य करने की योजना बनाई है। दुनिया के 20% तेल का यह मार्ग बंद होने से वैश्विक महंगाई का खतरा है।
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Apr 16, 2026
Strait of Hormuz Toll
ईरान और अमेरिका होर्मुज पर टोल वसूलना चाहते हैं। (PC: AI)

Strait of Hormuz Toll: दुनिया का 20 फीसदी फ्यूल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है और ईरान उस रास्ते पर टोल नाका लगाना चाहता है। होर्मुज स्ट्रेट, जिसे आम बोलचाल में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कहते हैं, दुनिया की सबसे व्यस्त तेल शिपिंग लेन है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने यह रास्ता बंद कर दिया था और अब शर्त रख दी है कि रास्ता खोलना है तो टोल देना होगा। साथ में यह भी कहा है कि जो जहाज गुजरेंगे, उन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से मंजूरी लेनी होगी।

असर सीधा आपकी जेब पर पड़ेगा

शिकागो यूनिवर्सिटी के एनर्जी पॉलिसी इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर सैम ओरी ने कहा कि ईरान ने यह दिखा दिया है कि वो इस रास्ते को बंद कर सकता है। अब वो इस ताकत का इस्तेमाल कीमत वसूलने में करेगा। ओरी के मुताबिक आने वाले वक्त में चीजें थोड़ी महंगी होने वाली हैं। यानी होर्मुज पर टोल लगा तो तेल महंगा होगा। तेल महंगा हुआ तो ट्रांसपोर्ट महंगा, ट्रांसपोर्ट महंगा हुआ तो सब्जी से लेकर दवाई तक सब कुछ महंगा। यह सिलसिला आपकी रसोई तक पहुंचेगा।

कानून क्या कहता है?

अब सवाल यह उठता है कि क्या ईरान को टोल वसूलने का कोई हक है? 1982 में बना और 1994 से लागू UNCLOS यानी समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र का कन्वेंशन कहता है कि दुनियाभर की 100 से ज्यादा जलसंधियों से जहाजों को बिना रोक-टोक गुजरने का अधिकार है। होर्मुज भी इनमें शामिल है। कोई भी देश किनारे के 12 समुद्री मील तक नियम बना सकता है लेकिन बेगुनाह जहाजों को रोकने का हक नहीं है। लेकिन पेंच यहां है। ईरान और अमेरिका दोनों ने UNCLOS पर दस्तखत नहीं किए हैं। करीब 170 देशों और यूरोपीय यूनियन ने इसे माना है, लेकिन ये दोनों बाहर हैं।

रॉयटर्स ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि UNCLOS को अब अंतरराष्ट्रीय प्रथागत कानून माना जाता है। लेकिन ईरान का तर्क है कि उसने हमेशा इस संधि पर आपत्ति जताई है, इसलिए वो इसे मानने के लिए बाध्य नहीं है। अमेरिका इस दावे से साफ इनकार करता है।

कौन रोक सकता है ईरान को?

यही सबसे बड़ी दिक्कत है। UNCLOS को लागू करने का कोई पक्का तरीका नहीं है। हैं। बर्ग की इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर लॉ ऑफ द सी हो या हेग की इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस, ये अदालतें फैसला दे सकती हैं, लेकिन उसे जमीन पर लागू करवाने की ताकत इनके पास नहीं है।

बाकी जो रास्ते हैं, वो ये हैं कि कोई देश या देशों का गठबंधन इस संधि को लागू करवाने की कोशिश करे। UN सुरक्षा परिषद प्रस्ताव पास कर सकती है। शिपिंग कंपनियां रास्ता बदल सकती हैं और कर रही भी हैं। इसके अलावा उन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं जो टोल देने को तैयार हों।

ट्रंप का अजीब सुझाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कह दिया कि ईरान के साथ मिलकर टोल वसूली एक तरह से होर्मुज को सुरक्षित करने का तरीका हो सकता है। लेकिन ईरान के 10 सूत्री शांति प्रस्ताव में इस तरह के किसी साझा काम का कोई जिक्र नहीं है। उल्टा ईरान ने मांग रखी है कि अमेरिका मध्य पूर्व से अपनी सेना हटाए, ईरान पर से प्रतिबंध उठाए और होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल बना रहने दे। ट्रंप ने यह भी सुझाव दिया है कि अमेरिका खुद होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगा सकता है। एक तरफ ईरान टोल मांग रहा है, दूसरी तरफ ट्रंप खुद टोल लगाने की बात कर रहे हैं। बीच में फंसे हैं दुनिया के बाकी देश जो इस रास्ते से तेल मंगाते हैं।

Updated on:
16 Apr 2026 01:28 pm
Published on:
16 Apr 2026 01:28 pm