कारोबार

Success Story: नौकरी के बजाय खेती को चुना, स्मार्ट तकनीक अपनाई और 23 दिन में कमा लिए 1.5 लाख रुपये

Success Story In Farming: उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति ने आईटीआई करके नौकरी करने के बजाय खेती करने की ठानी। उन्होंने सही तकनीक का इस्तेमाल कर महज 23 दिन में 1.5 लाख रुपये कमाएं है।

2 min read
May 25, 2026
Success Story: नौकरी के बजाय खेती की और कर ली बढ़िया कमाई। (PC: Socoal Media)

Success Story: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में रहने वाले अखिलेश मौर्य ने पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने के बजाए खेती को चुना। ITI पास करने के बाद ग्रेजुएशन भी की, लेकिन उनको नौकरी करना पंसद नहीं आया। बागवानी विभाग के अधिकारी की सलाह पर उन्होंने खीरे की ऑर्गेनिक खेती शुरू की और 23 दिन में ही 1.5 लाख की कमाई कर ली। आज उनकी यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है जो खेती को कमजोर विकल्प मानते हैं।

ये भी पढ़ें

ऑर्गेनिक खेती से चमक रही किसानों की किस्मत, कम खर्च में मिल रही शानदार पैदावार, जानें इनकी प्रेरणादायक कहानी

स्मार्ट तकनीक और सही बीज का चुनाव

अखिलेश ने एक एकड़ जमीन पर खीरे की खेती शुरू की। उन्होंने सिनजेंटा और क्लॉज अर्नो जैसी उन्नत किस्मों के खीरे लगाए। मार्च महीने में रेज्ड बेड फार्मिंग तकनीक यानी जमीन की सतह से लगभग 15-30 सेंटीमीटर ऊंची मेड़ बनाकर फसलें उगाई। इसके साथ ही सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया गया। इस पूरी तैयारी पर कुल खर्च करीब 30,000 रुपए आया, जिसमें ड्रिप इरिगेशन की स्थापना और रेज्ड बेड तैयार करने का खर्च शामिल था।

10 टन से ज्यादा हो चुकी है कटाई

अखिलेश के मुताबिक उनके खेत से रोजाना 7 से 8 क्विंटल खीरे की पैदावार हो रही है। 1 मई से अब तक करीब 10 टन खीरे की कटाई हो चुकी है। हार्वेस्टिंग (कटाई) के काम में रोजाना 7 से 8 मजदूर लगे रहते हैं। शुरुआत में बाजार में खीरे का भाव 14 से 15 रुपए प्रति किलोग्राम था, लेकिन अब यह 20 रुपए प्रति किलोग्राम से ऊपर जा चुका है। बढ़ते बाजार भाव ने उनकी कमाई को और रफ्तार दी।

23 दिन में 1.5 लाख रुपए कमाए

30,000 रुपए के कुल निवेश के मुकाबले अखिलेश ने हार्वेस्टिंग शुरू होने के सिर्फ 23 दिनों के भीतर करीब 1.5 लाख रुपए की कमाई कर ली। यह निवेश पर 5 गुना से भी ज्यादा का रिटर्न है। अखिलेश का कहना है कि खीरे की खेती में निवेश तुलनात्मक रूप से काफी कम होता है, जबकि सही सिंचाई व्यवस्था और फसल चुनाव के साथ मुनाफा काफी ज्यादा हो सकता है।

क्यों कामयाब हुई अखिलेश की खेती?

अखिलेश की सफलता के पीछे कुछ अहम फैसले रहे। पहला, बागवानी विभाग की सलाह पर परंपरागत फसलों की जगह खीरे जैसी हाई-वैल्यू सब्जी को चुना। दूसरा, रेज्ड बेड तकनीक से पौधरोपण किया जिससे जड़ों को बेहतर पोषण मिला। तीसरा, ड्रिप इरिगेशन से पानी की बचत के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता भी बेहतर रही। चौथा, उन्नत बीज किस्मों का चुनाव कर पैदावार को अधिकतम किया। इन सभी फैसलों ने मिलकर खीरे की खेती को कामयाब किया।

खेती भी दे सकती है नौकरी से बेहतर आमदनी

अखिलेश मौर्य की यह कहानी उस सोच को चुनौती देती है कि खेती घाटे का सौदा है। सही तकनीक, सही फसल और सरकारी विभागों की मदद से खेती न सिर्फ टिकाऊ आजीविका का जरिया बन सकती है, बल्कि किसी भी नौकरी से बेहतर आमदनी भी दे सकती है। मऊ के इस युवा किसान ने एक एकड़ जमीन और 30,000 रुपए से जो मिसाल कायम की है, वह आने वाले समय में कई युवाओं को खेती की तरफ मोड़ सकती है।

ये भी पढ़ें

PPF और SIP दोनों में हर महीने डालें 2000 रुपये तो 30 साल में कितने मिलेंगे वापस, किस स्कीम में है ज्यादा फायदा?
Published on:
25 May 2026 04:52 pm
Also Read
View All