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Sugar Company Shares: शुगर कंपनियों के शेयरों में लगातार दूसरे दिन आई 8% तक की तेजी, दाम बढ़ने का दिखा असर

Sugar Stocks: ब्राजील में सप्लाई की दिक्कत और वैश्विक कमी के अनुमानों के बीच चीनी के दाम 7 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचे। इस तेजी के चलते शुगर कंपनियों के मार्जिन में सुधार की संभावना से भारतीय चीनी कंपनियों के शेयर 8% तक उछले।
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Aug 14, 2026
Stock Market News
चीनी बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में तेजी आई है। (Source- Freepik)

Triveni Engineering Share Price: देश की चीनी बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में लगातार दूसरे दिन तेजी देखी गई। बलरामपुर चीनी मिल्स, धामपुर शुगर, डालमिया भारत, श्री रेणुका और ईआईडी पैरी जैसी कंपनियों के शेयर 8 फीसदी तक चढ़ गए। असल में भारत में चीनी के दाम बढ़कर 4,400 से 4,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं। कीमतों में पिछले एक महीने में 8 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और भाव पिछले 7 साल में सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। इससे भारतीय शुगर कंपनियों के मार्जिन सुधरने की उम्मीद बढ़ी है, जिसके चलते उनके शेयरों में तेजी देखी जा रही है।

किस कंपनी को कितना फायदा हुआ?

NSE पर बलरामपुर चीनी मिल्स का शेयर 2 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 633 रुपये पर पहुंच गया। धामपुर शुगर मिल्स का शेयर 4 फीसदी बढ़कर 168 रुपये और उत्तम शुगर 5 फीसदी बढ़कर 279 रुपये पर पहुंच गया। त्रिवेणी इंजीनियरिंग के शेयर की कीमत सबसे ज्यादा 8 फीसदी उछलकर 271 रुपये हो गई। दो दिनों में त्रिवेणी इंजीनियरिंग के शेयर में सबसे ज्यादा 12 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई। वहीं, ईआईडी पैरी के शेयर की कीमत 3 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 801 रुपये पर पहुंच गई।

ब्राजील में सप्लाई की दिक्कत बनी बड़ी वजह

दुनिया में सबसे ज्यादा चीनी बनाने वाला देश ब्राजील खराब मौसम की वजह से अपनी फसल कटाई में देरी की चेतावनी दे चुका है। ब्राजील ने अपनी उत्पादन रिपोर्ट भी रोक दी है, जिससे सप्लाई की सही जानकारी मिलना मुश्किल हो गया है। जून में ब्राजील के गन्ने के रस का 58 फीसदी हिस्सा एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हुआ, क्योंकि यह चीनी से ज्यादा मुनाफा देने वाला है। ब्राजील ने एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य जुलाई में बढ़ाकर 32 फीसदी कर दिया गया, जो जून में 30 फीसदी था।

भारत घटा सकता है निर्यात

भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक है, अगले तीन सीजन तक निर्यात के लिए ज्यादा चीनी नहीं बचा पाएगा। अल नीनो और एथेनॉल का बढ़ता उपयोग गन्ने की सप्लाई पर दबाव डाल रहे है। 2022-23 तक के पांच सीजन में भारत हर साल औसतन 68 लाख टन चीनी निर्यात करता था। इस साल करीब 8 लाख टन निर्यात के बाद भारत ने 30 सितंबर तक निर्यात पर रोक लगा दी है।

वैश्विक स्तर पर चीनी की कमी का अनुमान

ग्लोबल डेफिसिट के अनुमान भी बाजार में सप्लाई और कम होने की ओर इशारा कर रहे हैं। ग्रीन पूल ने दुनिया में 33 लाख टन चीनी की कमी का अनुमान लगाया है, जबकि स्टोनएक्स ने यह आंकड़ा 17 लाख टन बताया है। इंटरनेशनल शुगर ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक कमी 2.6 लाख टन रह सकती है।

Updated on:
14 Aug 2026 02:24 pm
Published on:
14 Aug 2026 02:23 pm