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Tata Group Stocks: एक खबर आई और टूट गए टाटा ग्रुप के शेयर, TCS से लेकर टाइटन तक में देखी गई बिकवाली

Tata Group के कई शेयरों में मंगलवार को 5 फीसदी तक गिरावट आई। इसकी वजह Tata Sons के संभावित पुनर्गठन की खबर है। Tata Trusts ने TESS और TCE के Tata Sons में विलय का प्रस्ताव दिया है।
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Sep 29, 2026
Tata Group Stocks
टाटा ग्रुप के शेयरों में गिरावट देखी जा रही है। (PC: AI)

Tata Trusts News: टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में मंगलवार, 29 सितंबर की सुबह तेज गिरावट देखने को मिली। टाटा टेलीसर्विसेस, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाइटन, TCS, टाटा केमिकल्स, टाटा पावर, टाटा स्टील और टाटा टेक्नोलॉजीज समेत कई शेयर 5 फीसदी तक टूट गए। बाजार में इस गिरावट की बड़ी वजह टाटा संस के संभावित पुनर्गठन से जुड़ी खबर को माना जा रहा है। हालांकि, शुरुआती कारोबार के बाद शेयरों में कुछ रिकवरी देखने को मिली।

PC: NSE, दोपहर 12 बजे

टाटा संस के पुनर्गठन का प्रस्ताव

रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी हिस्सेदार टाटा ट्रस्ट ने टाटा संस के पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का टाटा संस में विलय करने का सुझाव दिया गया है।

क्यों आया यह प्रस्ताव

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के बोर्ड से इस प्रस्ताव पर विचार करने और भारतीय रिजर्व बैंक से पहले ही नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेने को कहा है। इस प्रस्ताव के पीछे एक बड़ा नियामकीय पेंच है। टाटा ट्रस्ट्स का मानना है कि इन कंपनियों के विलय से टाटा संस को ऐसी स्थिति में लाया जा सकता है, जहां उसे कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) या गैर बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर वर्गीकृत किए जाने से बचने में मदद मिले।

टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, विलय के बाद नई इकाई की नेट एसेट वैल्यू करीब 2,00,158 करोड़ रुपये होगी। वहीं, ग्रुप की दूसरी कंपनियों में उसका निवेश करीब 1,77,120 करोड़ रुपये रहेगा। यानी ग्रुप कंपनियों में निवेश कुल नेट एसेट के 90 फीसदी से कम होगा। यही आंकड़ा इस पूरे मामले में अहम माना जा रहा है।

RBI के नियमों से क्यों जुड़ा है Tata Sons का मामला?

टाटा संस को आरबीआई ने अपर-लेयर एनबीएफसी यानी NBFC-UL की कैटेगरी में रखा है। साथ ही कंपनी पर कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी से जुड़े नियम भी लागू होते हैं। आरबीआई के नियमों के मुताबिक, अगर किसी कंपनी के रेवेन्यू का 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा वित्तीय संपत्तियों से आता है, तो उसे NBFC की कैटेगरी में रखा जा सकता है। वहीं, CIC वह NBFC होती है जिसकी कम से कम 90 फीसदी संपत्तियां ग्रुप की कंपनियों के शेयर, बॉन्ड या लोन में लगी हों।

टाटा संस के मामले में यही 90 फीसदी वाला नियम सबसे महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित विलय के बाद ग्रुप कंपनियों में निवेश का अनुपात 90 फीसदी की सीमा से नीचे आने का अनुमान है। इसी वजह से टाटा ट्रस्ट्स इस पुनर्गठन को नियामकीय दृष्टि से अहम मान रहा है।

टाटा संस की लिस्टिंग क्यों चर्चा में है?

आरबीआई के नियमों के तहत NBFC-UL कैटेगरी में आने वाली कंपनी को तय समय सीमा के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ता है। नियम के मुताबिक, इस कैटेगरी में पहचाने जाने के तीन साल के भीतर कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होना होता है। इसी नियम के चलते टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग लंबे समय से चर्चा में रही है। अब टाटा ट्रस्ट्स के प्रस्तावित पुनर्गठन से इस स्थिति में बदलाव की संभावना को लेकर बाजार में हलचल बढ़ी है। हालांकि, प्रस्ताव अभी टाटा संस के बोर्ड के विचार और आरबीआई की मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना है। इसलिए इसे अंतिम फैसला मानना जल्दबाजी होगी।

किन टाटा शेयरों में दिखी गिरावट?

पुनर्गठन की खबर सामने आने के बाद सुबह के कारोबार में टाटा ग्रुप के कई शेयरों पर दबाव दिखा। टाटा टेलिसर्विसेस, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल, टाइटन, टीसीएस, टाटा केमिकल्स, टाटा पावर, टाटा स्टील और टाटा टेक्नोलॉजीज में गिरावट दिखाई दी। इसके अलावा टाटा कैपिटल, टाटा कंज्यूमर, टाटा एलेक्सी, टाटा इन्वेस्टमेंट, ट्रेंट और वॉल्टास के शेयर भी कमजोर नजर आए। हालांकि, शुरुआती कारोबार के बाद गिरावट कम हो गई।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

Updated on:
29 Sept 2026 12:26 pm
Published on:
29 Sept 2026 11:55 am