Trump tariffs Greenland threat: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोपीय देशों को टैरिफ की चेतावनी भी दी है।
Trump tariffs impact on Americans: डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ दूसरे देशों से ज्यादा अमेरिका के लोगों को घायल कर रहा है। करीब एक साल से ट्रंप यह दावा करते आए हैं कि टैरिफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, क्योंकि दूसरे देशों को यूएस में कारोबार करने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी। लेकिन हो इसके एकदम उलट रहा है। एक रिसर्च बताती है कि डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ की सबसे ज्यादा मार अमेरिका की जनता को उठानी पड़ रही है। उनके खर्चों में एकदम से तेजी आ गई है, जबकि इनकम उतनी ही है। इसका मतलब यह हुआ है कि दूसरों पर चलाया गया ट्रंप का तीर उनके अपनों को ही घायल कर गया है।
जर्मन थिंक टैंक कील इंस्टीट्यूट फॉर द वर्ल्ड इकोनॉमी (Kiel Institute For World Economy) द्वारा प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, अमेरिकी लोग ट्रंप के टैरिफ का 96% बोझ उठा रहे हैं, क्योंकि इससे उनके रोजमर्रा के खर्चे बढ़ गए हैं। जब यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल 2025 में अपने "लिबरेशन डे" टैरिफ की घोषणा की थी, तो उन्होंने कहा था कि अमेरिका को दोस्त और दुश्मन, दोनों ने लूटा है। अब बारी उनसे इसकी कीमत वसूलने की है। उन्होंने दावा किया था कि टैरिफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती आएगी। साथ ही ट्रंप ने संकेत दिया था कि टैरिफ अमेरिकी जनता पर इनकम टैक्स का बोझ भी खत्म कर देगा। हालांकि, हो इसके एकदम उलट रहा है। अमेरिकी जनता को टैरिफ का सबसे ज्यादा बोझ उठाना पड़ रहा है।
यह स्टडी ऐसे समय आई है जब डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड (Trump tariffs Greenland threat) पर कब्जे के लिए टैरिफ को हथियार बना रहे हैं। ट्रंप ने सभी यूरोपीय देशों से कहा है कि अगर वे ग्रीनलैंड के मुद्दे पर उनका साथ नहीं देते हैं, तो अतिरिक्त टैरिफ के लिए तैयार रहें। डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड को 1 फरवरी से 10% टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है, जो 1 जून को बढ़कर 25% हो जाएगा। इतना ही नहीं ट्रंप ने फ्रेंच वाइन पर 200% टैरिफ लगाने की धमकी भी दी है। क्योंकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गाजा के लिए ट्रंप के प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने से इंकार कर दिया है। इस बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए 1 अरब डॉलर का निवेश आवश्यक शर्त रखी गई है।
स्टडी के अनुसार, अगस्त में अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने के बाद यूएस को होने वाला निर्यात यूरोपीय संघ, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया को होने वाली शिपमेंट की तुलना में 18% से 24% तक गिर गया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि निर्यातकों ने अमेरिका के बजाए अपना सामान दूसरे बाजारों में भेज दिया, जिससे उन्हें अतिरिक्त टैरिफ चुकाने की जरूरत नहीं पड़ी। रिसर्च टीम ने जनवरी 2024 और नवंबर 2025 के बीच 25 मिलियन से अधिक शिपमेंट रिकॉर्ड का एनालिसिस किया, जिसमें लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर का ट्रेड शामिल था। इस दौरान, उन्होंने पाया कि एक्सपोर्टर्स ने टैरिफ कॉस्ट का महज 4% ही वहन किया , जबकि अमेरिकी आयातकों ने ज्यादातर बढ़ोतरी ग्राहकों पर डाल दी।
टैरिफ से अमेरिकी कस्टम्स रेवेन्यू में 200 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन स्टडी में बताया गया है कि यह सारा पैसा आखिरकार अमेरिकियों की जेब से ही आ रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा था कि टैरिफ से US मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन अप्रैल 2025 से हर महीने मैन्युफैक्चरिंग जॉब्स में कमी देखने को मिल रही है। लिबरेशन डे से नवंबर, 2025 के बीच, इस सेक्टर में लगभग 60,000 नौकरियां खत्म हो गईं हैं।