अडानी समूह ने अमेरिकी रिश्वतखोरी मामले में पहली बार अदालत में कानूनी दलील दाखिल की है। इसमें यूएस कोर्ट से एसईसी के मोशन पर फैसला टालने की मांग की गई है।
US Bribery Case Adani: पिछले कुछ महीनों से अमेरिकी बाजार नियामक और भारतीय कारोबारी समूह अडानी के बीच कानूनी खींचतान वैश्विक सुर्खियों में बनी हुई है। इस मामले में निवेशकों की नजरें अमेरिकी अदालत की हर सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर भारत और विदेश दोनों जगह के कारोबार पर पड़ सकता है। इसी क्रम में अडानी समूह ने पहली बार अमेरिकी अदालत में औपचारिक कानूनी दलील दाखिल करते हुए फैसले को फिलहाल टालने की मांग की है, जिसे मामले का अहम मोड़ माना जा रहा है।
अडानी समूह के चेयरपर्सन गौतम अडानी की ओर से दाखिल की गई इस पहली कानूनी सबमिशन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लाइव मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, यह सबमिशन अमेरिका की उस अदालत में दी गई है, जहां अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने रिश्वतखोरी और सिक्योरिटीज फ्रॉड से जुड़ा केस दर्ज किया है। अडानी पक्ष ने अदालत से अनुरोध किया है कि 21 जनवरी को एसईसी की ओर से दायर मोशन पर तुरंत फैसला न सुनाया जाए और इसे कुछ समय के लिए टाल दिया जाए।
रिपोर्ट में बताया है कि अडानी की ओर से पैरवी कर रही ग्लोबल लॉ फर्म ने अदालत को बताया कि इस समय दोनों पक्षों के वकील एक स्टिपुलेशन पर चर्चा कर रहे हैं। स्टिपुलेशन एक तरह का औपचारिक कानूनी समझौता होता है, जिसमें मुकदमे से जुड़े किसी तथ्य या प्रक्रिया पर दोनों पक्ष सहमति बना लेते हैं। इसका उद्देश्य अदालत में बार बार बहस से बचना और प्रक्रिया को सरल बनाना होता है। हालांकि, अडानी पक्ष ने यह स्पष्ट नहीं किया कि एसईसी के साथ किन बिंदुओं पर सहमति बनाने की कोशिश हो रही है।
इस कानूनी घटनाक्रम का सीधा असर अडानी समूह से जुड़े निवेशकों और बाजार की धारणा पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फैसले के टलने से अडानी को अपनी रणनीति मजबूत करने का समय मिलेगा, जबकि यह एसईसी के लिए भी मामले को विस्तार से रखने का अवसर होगा। भारत में भी इस केस पर करीबी नजर रखी जा रही है, क्योंकि किसी भी सख्त फैसले का प्रभाव शेयर बाजार, फंडिंग और ग्लोबल बिजनेस डील्स पर पड़ सकता है।