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Oil Crisis: अमेरिका के लिए गले की फांस बना ईरान युद्ध, ट्रंप की नीयत पर उठे सवाल

Iran War : ईरान पर हमले के बाद अमेरिका में डीजल के दाम 5 डॉलर (करीब 415 रुपये) बढ़ गए हैं। अमेरिकी मीडिया ट्रंप की नीयत पर सवाल उठा रही है, जिससे उनके ही देश में सरकार का भारी विरोध शुरू हो गया है।

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Mar 17, 2026
अमेरिका के प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप। ( प्रतीकात्मक फोटो: AI)

Geopolitical Crisis : मेरिका (United States) और ईरान (Iran) के बीच चल रही जंग का असर अब सीधे अमेरिकी जनता पर पड़ने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को अपने ही देश में भारी आलोचना (Backlash) का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी मीडिया (US Media) की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की नीयत (Intention) पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह हमला केवल तेल के कुओं (Oil Wells) पर कब्जे के लिए किया गया था। इस भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Crisis) के कारण अमेरिका में डीजल के दामों में रिकॉर्ड 5 डॉलर (Diesel Price Hike) का भारी इजाफा हो गया है। भारतीय मुद्रा (Indian Rupee) में यह रकम करीब 415 से 420 रुपये के बराबर है। इस अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि (Price Surge) ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है।

अमेरिका में डीजल की कीमतों में इजाफा (Fuel Crisis)

अमेरिका में आम आदमी इस युद्ध की भारी कीमत चुका रहा है। यूएस मीडिया और न्यूज एजेंसियों के अनुसार, डीजल की कीमतों में अचानक 5 डॉलर (लगभग 415 रुपये) की बढ़ोतरी ने ट्रांसपोर्टेशन और माल ढुलाई की लागत को आसमान पर पहुंचा दिया है। गैलन के हिसाब से बिकने वाले तेल के दाम बढ़ने से अमेरिकी नागरिकों की जेब पर सीधा डाका डला है और वहां महंगाई का एक नया और भयंकर दौर शुरू हो गया है।

अमेरिका किससे और कितना लेता है तेल (Oil Imports)

हालांकि अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है, लेकिन वह अपनी पूरी घरेलू जरूरतें खुद पूरी नहीं कर सकता। यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका मुख्य रूप से अपने पड़ोसी देश कनाडा और मेक्सिको से सबसे ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। इसके अलावा सऊदी अरब, इराक और कोलंबिया से भी लाखों बैरल तेल प्रतिदिन खरीदा जाता है। ईरान विवाद के बाद खाड़ी देशों से होने वाली यह सप्लाई चैन बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।

जंग का यूएस डीजल के भाव पर असर (War Impact)

ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। इसी डर से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसका सीधा और तत्काल असर अमेरिकी गैस स्टेशनों पर दिखा है, जहां रातों-रात डीजल के दाम 5 डॉलर प्रति गैलन तक उछल गए।

ट्रंप की क्या है नीयत (Trump Strategy)

अमेरिकी मीडिया और वहां के राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य लक्ष्य मध्य पूर्व के ऊर्जा संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना है। कई रिपोर्ट्स में यह अंदेशा जताया गया है कि ईरान के प्रमुख तेल कुओं और रिफाइनरियों को निशाना बनाने के पीछे अमेरिका की कूटनीतिक और आर्थिक एकाधिकार की नीति है। हालांकि, देश के भीतर डीजल के दाम बढ़ने से यह दांव खुद ट्रंप सरकार पर उल्टा पड़ता दिख रहा है।

अमेरिका को भारी आर्थिक मंदी की ओर धकेल सकती है जंग

अमेरिकी विपक्षी दल और आम जनता ट्रंप की इस 'ऑयल पॉलिटिक्स' का सड़कों और सोशल मीडिया पर कड़ा विरोध कर रहे हैं। अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि यह बिना सोचे-समझे छेड़ा गया युद्ध अमेरिका को भारी आर्थिक मंदी की ओर धकेल सकता है।

पूरी दुनिया की नजरें ओपेक (OPEC) देशों के अगले कदम पर टिकी हुईं

आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई को कंट्रोल करने के लिए अपनी ब्याज दरों में आपातकालीन बदलाव कर सकता है। वहीं, वैश्विक तेल सप्लाई को सुचारू रखने के लिए ओपेक (OPEC) देशों के अगले कदम पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में आ सकता है भयानक उछाल

अगर अमेरिका में डीजल इतना महंगा होता है, तो भारत सहित पूरी दुनिया में शिपिंग कॉस्ट (माल ढुलाई) महंगी हो जाएगी। इससे आयात-निर्यात पर असर पड़ेगा और विकासशील देशों में भी पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भयानक उछाल आ सकता है।

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