Disadvantages of Starting to Invest Late: इस बात को समझना जरूरी होता है कि सही समय पर निवेश करना शुरु करें। क्योंकि देर से निवेश शुरु करने से 1.05 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। लेकिन इस नुकसान की भरपाई का रास्ता भी है, जिसे इस आर्टिकल में कवर किया गया है।
The Power of Compounding Interest: पैसों को बचाने के लिए या वेल्थ क्रिएशन के लिए निवेश करना चाहिए यह तो सभी जानते हैं। लेकिन निवेश करने से ज्यादा जरुरी है सही समय पर निवेश शुरु करना, यह बात बहुत ही कम लोग जानते हैं। लोग अक्सर चर्चा करते हुए दिख जाएंगे कि निवेश करना चाहिए, लेकिन देर से निवेश शुरु करने के क्या-क्या नुकसान हो सकते है, इसके बारे में लोग चर्चा नहीं करते। लेकिन एक बात साफ है कि देर से निवेश करने पर रिटर्न कम हो जाता है और आपकी वेल्थ क्रिएशन पर इसका नेगेटिव इंपेक्ट पड़ता है।
यह और भी ज्यादा जरूरी तब हो जाता है जब, निवेशक लॉन्ग टर्म की निवेश योजना बना रहा हो। क्योंकि निवेश में कुछ साल की देरी भी करोड़ों का फर्क डाल सकती है। यह सब कंपाउंडिंग की ताकत की वजह से होता है। और इस जादू को इस आर्टिकल में आसानी से समझाया गया है। इसके साथ ही देरी से निवेश शुरु करने पर होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे करें यह भी समझाया गया है।
जल्दी निवेश शुरु करने से ज्यादा रिटर्न मिलता है इसका सबसे बड़ा कारण है कंपाउंडिगं। इस फर्क को समझाने के लिए अमन, राहुल और रोहित का उदाहरण लिया गया है, जिन्होंने अलग-अलग समय पर निवेश करना शुरु किया था। तीनों ही म्यूचुअल फंड सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में निवेश करते हैं।
| निवेशक | शुरुआत की उम्र | मासिक निवेश (₹) | निवेश अवधि (साल) | कुल निवेश (₹) | अनुमानित 12% रिटर्न (₹) | कुल बचत(₹) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| अमन | 25 साल | 5,000 | 35 साल | 21 लाख | 2.54 करोड़ | 2.75 करोड़ |
| राहुल | 30 साल | 5,000 | 30 साल | 18 लाख | 1.36 करोड़ | 1.54 करोड़ |
| रोहित | 35 साल | 10,000 | 25 साल | 30 लाख | 1.40 करोड़ | 1.70 करोड़ |
अमन ने 25 साल के लिए हर माह 5,000 रुपये का निवेश किया। दूसरी तरफ रोहित ने 35 की उम्र में 10,000 का मासिक निवेश किया। सिर्फ देरी से निवेश करने पर 1.05 करोड़ रुपये का अंतर आ जाता है।
इस बड़े अंतर के दो सबसे जरूरी कारण है एक है कंपाउंडिंग इंटरेस्ट की ताकत और एक है 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग'। यानी आप बाजार की चिंता किए बगैर लगातार एक निश्चित राशि हर माह निवश करते हैं। चाहे बाजार में गिरावट आए या तेजी।
SIP में आप यूनिट्स खरीदते हैं जब कीमतें कम होती हैं, तो आप ज्यादा यूनिट्स खरीदते हैं, और जब कीमतें ज्यादा होती हैं, तो आप कम यूनिट्स खरीदते हैं। समय के साथ, यह आपकी कुल खरीदने की लागत को बैलेंस करने में मदद करता है, जिसे 'रूपी कॉस्ट एवरेजिंग' कहा जाता है।
निवेश में होने वाली इस देरी की भरपाई की जा सकती है। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि जैसे-जैसे इनकम बढ़ती है, आप हर साल निवेश की रकम को एक तय प्रतिशत से बढ़ाएं। इसके अलावा एकमुश्त निवेश किया जा सकता है। यदि आपको कोई बोनस मिले या पहले की कोई बचत हो तो उसे अपनी मौजूदा म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करके ज्यादा यूनिट पाई जा सकती है।
इसलिए यह सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप सही समय पर निवेश करना शुरु करें। यदि देरी से निवेश शुरु करना भी पड़े तो ऊपर बताएं तरीकों को अपनाकर कुछ हद तक रिकवरी की जा सकती है।