
IT Stocks News: काफी समय तक दबाव झेलने के बाद भारतीय आईटी शेयरों में फिर से जान आती दिख रही है। जिस सेक्टर को पिछले एक साल से सुस्त मांग, कमजोर कमाई और AI से जुड़ी अनिश्चितताओं ने परेशान कर रखा था, वही अब निवेशकों की पहली पसंद बनने लगा है। निफ्टी आईटी में आज मंगलवार को सबसे अधिक तेजी दर्ज हुई है। यह इंडेक्स 4.23 फीसदी की भारी उछाल के साथ 31,116 पर बंद हुआ। इन्फोसिस, टीसीएस, कोफोर्ज और एचसीएल टेक के शेयर में सबसे अधिक उछाल आया है। अब सवाल यह है कि आखिर अचानक ऐसा क्या बदल गया कि आईटी शेयरों में खरीदारी बढ़ने लगी?
आईटी सेक्टर में तेजी की शुरुआत अमेरिका से हुई। क्लाउड सॉफ्टवेयर कंपनी स्नोफ्लेक ने उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए और भविष्य की मांग को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। इससे निवेशकों को भरोसा मिला कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती की चिंताओं के बावजूद कंपनियां अभी भी सॉफ्टवेयर, क्लाउड सर्विसेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर खर्च कर रही हैं।
भारतीय आईटी कंपनियों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका और दूसरे विदेशी बाजारों से आता है। जब वैश्विक टेक कंपनियों का कारोबार मजबूत दिखता है, तो इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी सकारात्मक पड़ता है।
आईटी शेयरों की तेजी में एक और बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़ी उम्मीदें हैं। बाजार को लग रहा है कि इस साल के अंत तक अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती शुरू हो सकती है। आमतौर पर टेक्नोलॉजी कंपनियों को कम ब्याज दरों का फायदा मिलता है। इससे भविष्य की कमाई का मूल्य बढ़ जाता है और निवेशक ऐसे शेयरों में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। यही वजह है कि अमेरिकी टेक शेयरों में आई तेजी का असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी देखने को मिल रहा है।
आईटी कंपनियों के लिए डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी अक्सर अच्छी खबर मानी जाती है। भारत की बड़ी आईटी कंपनियां अपनी सेवाओं के बदले ज्यादातर भुगतान डॉलर में प्राप्त करती हैं। ऐसे में जब डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो विदेशी कमाई को रुपये में बदलने पर ज्यादा राजस्व मिलता है। इससे कंपनियों के मार्जिन और मुनाफे को सहारा मिलता है। हाल के महीनों में रुपया रिकॉर्ड निचले स्तरों तक पहुंचा था। भले ही बाद में उसमें कुछ सुधार आया हो, लेकिन वह अभी भी अपेक्षाकृत कमजोर बना हुआ है, जो आईटी कंपनियों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
कुछ समय पहले तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर काफी उत्साह था, लेकिन कई निवेशकों को यह चिंता भी थी कि इसका वास्तविक फायदा कब दिखाई देगा। अब तस्वीर बदलती दिख रही है। दुनियाभर की कंपनियां AI पर वास्तविक खर्च बढ़ा रही हैं। डेटा मैनेजमेंट, क्लाउड माइग्रेशन, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में नए प्रोजेक्ट्स शुरू हो रहे हैं। निवेशकों का मानना है कि इस पूरे बदलाव का बड़ा फायदा भारतीय आईटी कंपनियों को मिल सकता है।
एक और अहम वजह वैल्यूएशन है। पिछले एक साल में आईटी शेयरों में भारी गिरावट आई थी। ग्राहक खर्च में कमी, कमजोर आय वृद्धि और AI से पारंपरिक आउटसोर्सिंग बिजनेस पर पड़ने वाले असर की आशंकाओं ने निवेशकों को दूर कर दिया था। नतीजा यह हुआ कि कई दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयर अपने पुराने उच्च स्तरों से काफी नीचे आ गए। अब निवेशकों को लग रहा है कि इन शेयरों में कीमत के मुकाबले अच्छा अवसर बन चुका है। यही वजह है कि बेहतर माहौल मिलते ही खरीदारी लौट आई है।
यही सबसे बड़ा सवाल है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी शेयरों की आगे की दिशा तीन बातों पर निर्भर करेगी। पहली, AI पर वैश्विक खर्च कितनी तेजी से बढ़ता है। दूसरी, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती कब शुरू होती है। और तीसरी, भारतीय आईटी कंपनियां आने वाली तिमाहियों में कितनी मजबूत कमाई दिखाती हैं। फिलहाल निवेशक यह मानकर चल रहे हैं कि सेक्टर का सबसे मुश्किल दौर शायद पीछे छूट चुका है। AI से जुड़े अवसर बढ़ रहे हैं, रुपये का रुख अनुकूल है और वैल्यूएशन पहले के मुकाबले ज्यादा आकर्षक दिखाई दे रहे हैं।