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Share Market में 5वें दिन भी गिरावट, ताइवान के बाद साउथ कोरिया से भी पीछे हुआ शेयर बाजार

Share Market on 2 June 2026: भारतीय शेयर बाजार ने जून के दूसरे कारोबारी दिन भी गिरावट के साथ शुरुआत की। सेंसेक्स में 415 अंकों और निफ्टी-50 में 142 अंकों की गिरावट देखी गई।
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भारत

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Gajanand Prajapat

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Updated: 2 Jun 2026, 11:29 AM IST

Why Share Market Fall

शेयर बाजार में आज भी गिरावट देखने को मिली है। (PC: AI)

भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को गिरावट के साथ शुरुआत की। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और FII की लगातार बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही 0.5 फीसदी से ज्यादा टूट गए। सुबह 9:17 बजे सेंसेक्स 415 अंक गिरकर 73,852 पर आ गया, जबकि निफ्टी 142 अंक गिरकर 23,240 पर कारोबार कर रहा था। बाजार में इस गिरावट के बाद थोड़ी बहुत रिकवरी शुरु हुई और सेंसेक्स में फिलहाल 300 अंकों की गिरावट है। वहीं, इंडिया VIX यानी वोलैटिलिटी इंडेक्स 2.5 फीसदी घटकर 16.13 पर आ गया है।

2 देशों से पिछड़ा भारतीय शेयर बाजार

वहीं, भारतीय शेयर बाजार अब साउथ कोरिया से भी पिछड़ गया है। इससे पहले ताइवान का शेयर बाजार हमसे आगे निकला था। इस तरह करीब 1 हफ्ते में 2 देशों के शेयर बाजार हमसे आगे निकल गए हैं। भारतीय शेयर बाजार अब सातवें नंबर पर आ गया है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन अब 4.8 ट्रिलियन डॉलर के आसपास रह गया है, जबकि साउथ कोरिया का स्टॉक मार्केट 5 ट्रिलियन डॉलर के एम-कैप को पार कर गया है। इस तरह भारत दुनिया के शेयर बाजारों की रैंकिंग में सातवें स्थान पर खिसक गया है।

साउथ कोरिया ने लगाई लंबी छलांग

साउथ कोरिया ने इस साल भारत समेत कनाडा, जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस के शेयर बाजारों को पीछे छोड़ दिया है। इस साल कोरिया के शेयर बाजार यानी कोस्पी में 100 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई है। कोरिया का कुल मार्केट कैप इस साल 86 फीसदी उछलकर 5 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया।

Samsung और SK Hynix बने असली ग्रोथ इंजन

साउथ कोरिया की इस जबरदस्त उछाल के पीछे AI मेमोरी चिप बनाने वाली दो दिग्गज कंपनियां हैं - सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स। दोनों कंपनियां अब 1 ट्रिलियन डॉलर वैल्यूएशन क्लब की सदस्य बन चुकी हैं। दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में इन कंपनियों की मेमोरी चिप की भारी मांग है और इसी ने कोरियाई बाजार को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है।

भारत के पिछड़ने के तीन बड़े कारण

पहला कारण है रुपये की कमजोरी। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट ने विदेशी निवेशकों के रिटर्न को सीधे प्रभावित किया है। दूसरा कारण है विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड निकासी। इस साल FII यानी विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है। तीसरा और सबसे अहम कारण यह है कि भारत के पास AI इंफ्रास्ट्रक्चर से सीधे जुड़ी कोई बड़ी कंपनी नहीं है। जबकि कोरिया और ताइवान की चिप कंपनियां AI की वैश्विक मांग का सीधा फायदा उठा रही हैं।

एसेट वैल्यू इन्वेस्टर्स के वरिष्ठ निवेश विश्लेषक रॉस मैकगैरी (Ross McGarry) ने कहा कि भारत के शेयर बाजार से आगे निकलना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन कोरियाई बाजार की यह तेजी मुख्य रूप से मेमोरी चिप साइकिल पर टिकी है। इसकी असली परीक्षा तब होगी, जब कॉरपोरेट गवर्नेंस सुधारों के जरिए इस बढ़े हुए मार्केट कैप को लगातार बनाए रखा जा सकेगा।

GDP में भारत अभी भी आगे

शेयर बाजार की रैंकिंग में पिछड़ने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। IMF के अनुमान के अनुसार भारत की GDP 4.15 ट्रिलियन डॉलर है जो साउथ कोरिया की 1.93 ट्रिलियन डॉलर की GDP से दोगुनी से भी ज्यादा है। भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है।