
यह फेस्टिव सीजन चल रहा है। इस समय चाहे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स हों या ऑफलाइन मार्केट्स, सब तरफ ऑफर्स की बाढ़ आई हुई है। कई बार वाट्सएप्स और इंस्टाग्राम पर भी ऑफर्स के लिंक्स आ जाते हैं। ध्यान रखें कि फेस्टिव सीजन में ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस काफी बढ़ जाते हैं और इसी समय धोखेबाज भी काफी अधिक सक्रिय रहते हैं। डिजिटल बैंकिंग ने पैसे भेजना, बिल चुकाना और ऑनलाइन खरीदारी करना आसान बना दिया है। इसी सुविधा के साथ साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में जरूरी है कि डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरती जाए। छोटी सी लापरवाही बैंक खाते को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।
डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड ऐसी ऑनलाइन धोखाधड़ी है, जिसमें साइबर अपराधी मोबाइल, इंटरनेट, UPI या अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके लोगों के पैसे चुरा लेते हैं। कई बार वे बैंक खाते की गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते हैं और फिर बिना अनुमति के लेनदेन करते हैं। इस तरह की ठगी में फर्जी फोन कॉल, एसएमएस, ईमेल, वाट्सएप लिंक, नकली वेबसाइट और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाता है। ठग लोगों से ओटीपी, पासवर्ड, सीवीवी या यूपीआई पिन हासिल करने की कोशिश करते हैं। आइए जानते हैं कि किन-किन तरीकों से डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड हो रहे हैं।
फ्रॉड करने वाले लोग बैंक, सरकारी विभाग या किसी भरोसेमंद कंपनी के नाम से फर्जी एसएमएस, ईमेल और वाट्सएप मैसेज भेजते हैं। इनमें केवाईसी अपडेट करने, बैंक खाता चालू रखने या इनाम पाने का लालच दिया जाता है। लिंक खोलकर जानकारी भरते ही खाते की डिटेल्स ठगों तक पहुंच सकती हैं।
UPI से पेमेंट करते समय ठग फर्जी कलेक्ट रिक्वेस्ट भेज सकते हैं या पैसे मिलने का झांसा दे सकते हैं। कई बार वे रिफंड या भुगतान प्राप्त करने के नाम पर यूपीआई पिन डालने को कहते हैं। ध्यान रखें, पैसे प्राप्त करने के लिए आमतौर पर यूपीआई पिन डालने की जरूरत नहीं होती।
ठग बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं और कार्ड की लिमिट बढ़ाने, केवाईसी पूरा करने या खास ऑफर देने के नाम पर ओटीपी मांगते हैं। ओटीपी मिलने के बाद वे खाते या कार्ड से अनधिकृत लेनदेन करने की कोशिश कर सकते हैं। ओटीपी किसी के साथ शेयर न करें।
इस तरीके में ठग एटीएम या कार्ड से पेमेंट करने वाली मशीन में छिपा हुआ उपकरण लगाकर कार्ड की जानकारी कॉपी कर सकते हैं। बाद में इस जानकारी का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए एटीएम इस्तेमाल करने से पहले कार्ड स्लॉट और कीपैड पर किसी संदिग्ध उपकरण के संकेत जरूर देखें।
अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर लोग जल्दी लोन देने वाले ऐप या अनजान एजेंट के झांसे में आ सकते हैं। ऐसे ऐप प्रोसेसिंग फीस, बैंक डिटेल्स या निजी जानकारी के नाम पर ठगी कर सकते हैं। लोन लेने से पहले बैंक या NBFC की वैधता और ऐप की प्रामाणिकता जांचें।
बैंक कर्मचारी भी आपसे फोन पर यूपीआई पिन या ओटीपी शेयर करने को नहीं कहेंगे। ऐसी डिमांड करने वाले व्यक्ति से सावधान रहें।
बैंकिंग से जुड़ी जानकारी भरने से पहले वेबसाइट का सही पता जांचें। अनजान एसएमएस या वाट्सएप लिंक से बैंकिंग ऐप डाउनलोड न करें।
अलग-अलग खातों के लिए अलग पासवर्ड इस्तेमाल करें। जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें।
रेलवे स्टेशन, कैफे या अन्य सार्वजनिक जगहों के ओपन Wi-Fi पर बैंकिंग लेनदेन करने से बचें। जरूरत पड़ने पर अपने मोबाइल डेटा का इस्तेमाल करें।
खाते से पैसे कटने का अलर्ट चालू रखें। किसी अनजान लेनदेन की जानकारी मिलते ही बैंक से संपर्क करें।
ऐप केवल आधिकारिक ऐप स्टोर या बैंक की वेबसाइट से डाउनलोड करें। अनजान ऐप को स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की अनुमति न दें।
किसी भी अनजान ऐप या व्यक्ति के जरिए तुरंत लोन लेने से बचें। संबंधित बैंक या आरबीआई रेगुलेटेड NBFC की जानकारी आधिकारिक स्रोतों से जांचें।