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IDBI बैंक में सरकार और LIC बेचेगी अपना हिस्सा, 52,878 करोड़ में Fairfax खरीदेगी 60.72% हिस्सेदारी

IDBI Bank Privatization: केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में सरकार और LIC की 60.72% हिस्सेदारी Fairfax को 52,878 करोड़ रुपये में बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। Fairfax की बोली 81 रुपये प्रति शेयर है। सौदे के लिए RBI की मंजूरी जरूरी है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

•

Oct 14, 2026

IDBI Bank privatization

सरकार ने IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी है। (PC: AI)

IDBI बैंक के मालिकाना हक में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने बैंक में अपनी और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कनाडा की कंपनी Fairfax Financial Holdings की इकाई Fairfax को 52,878 करोड़ रुपये में बैंक की 60.72% हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव है। इससे बैंक के प्रबंधन का नियंत्रण निजी हाथों में जा सकता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस सौदे को रणनीतिक विनिवेश के बजाय 'रणनीतिक पुनर्गठन' बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सौदे के बाद भी सरकार और एलआईसी की बैंक में हिस्सेदारी बनी रहेगी।

सरकार और LIC की कितनी हिस्सेदारी बिकेगी?

प्रस्तावित सौदे के तहत Fairfax को आईडीबीआई बैंक में कुल 60.72% हिस्सेदारी मिलेगी। इसमें सरकार की 30.48% और LIC की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है। Fairfax ने प्रति शेयर 81 रुपये की बोली लगाई है। इसी के आधार पर सौदे का कुल मूल्य 52,878 करोड़ रुपये तय किया गया है। डील की शर्तों के मुताबिक, Fairfax को अगले दो साल में CSB बैंक का आईडीबीआई बैंक के साथ विलय करना होगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, विलय के बाद संयुक्त बैंक में सरकार और एलआईसी की कुल हिस्सेदारी करीब 34% रहने की उम्मीद है।

एलआईसी की आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी मौजूदा करीब 19% से घटकर अगले दो साल में 15% रह सकती है। सरकार अपनी बची हुई हिस्सेदारी ओपन मार्केट में बेचेगी। इसके अलावा, Fairfax को अधिग्रहण से जुड़े नियमों के तहत आईडीबीआई बैंक के अन्य शेयरधारकों के लिए भी ओपन ऑफर लाना होगा।

पहले क्यों खारिज हुई थी बोली?

सरकार ने Fairfax की बोली स्वीकार करने से पहले बैंक की वैल्यूएशन की दोबारा समीक्षा की है। शुरुआती दौर में मिली बोलियां 94.42 रुपये प्रति शेयर के तय न्यूनतम मूल्य तक नहीं पहुंच पाई थीं। इसलिए उन्हें खारिज कर दिया गया था। इसके बाद सरकार ने आईडीबीआई बैंक के शेयरों में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए वैल्यूएशन का नए सिरे से आकलन किया।

इसके बाद दो इंडिपेंडेंट वैल्यूएशंस के आधार पर बैंक का बेंचमार्क प्राइस 75.99 रुपये प्रति शेयर तय किया गया। Fairfax की 81 रुपये प्रति शेयर की बोली इस स्तर से अधिक है। इसी वजह से सरकार सौदे को आगे बढ़ाने की स्थिति में आई।

RBI की मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगा सौदा

आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। सौदे को भारतीय रिजर्व बैंक की 'फिट एंड प्रॉपर' जांच और दूसरी जरूरी कानूनी व नियामकीय मंजूरियां मिलना बाकी है। आरबीआई यह जांच करेगा कि Fairfax बैंक का मालिकाना हक और प्रबंधन संभालने के लिए तय मानकों पर खरी उतरती है या नहीं। बैंकिंग क्षेत्र में किसी बड़े निवेशक को नियंत्रण देने से पहले उसकी उपयुक्तता और नियामकीय शर्तों का पालन जरूरी होता है। इसके साथ ही Fairfax को अधिग्रहण से जुड़े नियमों के अनुसार ओपन ऑफर की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। इन मंजूरियों के बाद ही सौदे को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।

2021 में शुरू हुई थी IDBI बैंक को बेचने की प्रक्रिया

आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक हिस्सेदारी बेचने की योजना केंद्र सरकार ने मई 2021 में मंजूर की थी। इसके बाद अक्टूबर 2022 में निवेशकों से रुचि पत्र यानी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट आमंत्रित किए गए थे। अब Fairfax की बोली स्वीकार होने से सरकार की लंबे समय से अटकी इस योजना को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। हालांकि, सौदे की अंतिम सफलता नियामकीय मंजूरियों और तय शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी।