
सितंबर में थोक महंगाई में भारी इजाफा हुआ है। (PC: AI)
Inflation News: महंगाई का दबाव अब सिर्फ आम लोगों की रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनियों की लागत पर भी इसका असर बढ़ रहा है। सितंबर 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 11.39% हो गई, जबकि अगस्त में यह 9.92% थी। फ्यूल, बिजली, खाद्य पदार्थों और तैयार सामान की कीमतों में तेजी इसकी प्रमुख वजह रही। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, थोक महंगाई में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ाने वाली है।
इससे पहले जारी आंकड़ों में खुदरा महंगाई बढ़ने की जानकारी सामने आई थी। सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% हो गई, जो अगस्त में 4.83% थी। सब्जियों समेत खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल इसका प्रमुख कारण रहा।
सितंबर में ईंधन और बिजली की थोक महंगाई दर बढ़कर 25.85% हो गई, जबकि अगस्त में यह 22.93% थी। तैयार सामान यानी मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई भी 8.37% से बढ़कर 9.76% पर पहुंच गई। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर में भी बढ़ोतरी हुई। इस कैटेगरी में खाद्य पदार्थ, गैर-खाद्य वस्तुएं और खनिज शामिल हैं। अगस्त में यह दर 7.76% थी, जो सितंबर में बढ़कर 8.67% हो गई।
खाद्य वस्तुओं और तैयार खाद्य उत्पादों को मिलाकर बनने वाले थोक खाद्य सूचकांक में महंगाई दर 7.05% से बढ़कर 8.66% हो गई। यानी खाने-पीने की चीजों की कीमतों का दबाव थोक बाजार में भी तेज हुआ है।
मंत्रालय के मुताबिक, खनिज तेल, खाद्य पदार्थ, क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस, कोयला, लिग्नाइट, बेसिक मेटल, केमिकल, कपड़ा, रबर, प्लास्टिक उत्पाद और बिजली से जुड़े उपकरणों की कीमतों ने थोक महंगाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इन वस्तुओं की कीमतें बढ़ने का असर आगे चलकर दूसरी चीजों पर भी पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ती है। वहीं, धातुओं और रसायनों की कीमतों में तेजी से कई उद्योगों के लिए उत्पादन महंगा हो सकता है। कंपनियां यदि बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डालती हैं, तो इसका असर खुदरा कीमतों पर भी पड़ सकता है।
अर्थशास्त्रियों के एक सर्वे के मुताबिक, अगले कुछ महीनों तक खाद्य महंगाई ऊंचे स्तर पर रह सकती है। हालांकि, खरीफ फसलों की नई आवक और सर्दियों में रबी फसलों की आपूर्ति बढ़ने से राहत मिल सकती है। इसका असर 2026 के आखिरी महीनों या 2027 की शुरुआत में दिखने की उम्मीद है। लेकिन यह काफी हद तक फसल उत्पादन और मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा। इस बार मानसून की असमान बारिश और अल नीनो का खतरा चिंता बढ़ा रहा है। मौसम में बदलाव से खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। वहीं, जलाशयों में पानी का स्तर कम रहने पर रबी फसलों की बुवाई और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
Updated on:
14 Oct 2026 12:59 pm
Published on:
14 Oct 2026 12:36 pm
बड़ी खबरें
View Allकारोबार
ट्रेंडिंग
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
