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कहीं आपकी गाड़ी में भी तो नकली पार्ट्स नहीं लगे, ऐसे करें पहचान

नकली कलपुर्जों की है भरमार रोड एक्सीडेंट की वजह बनते हैं नकली स्पेयर पार्ट्स

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Aug 18, 2019

नई दिल्ली: हमारे देश में गाड़ियों के नकली पार्ट्स एक बड़ी समस्या है। महंगी से महंगी गाड़ियों के नकली पार्ट्स आपको मार्केट में मिल जाएंगे और इन नकली पार्ट्स की वजह से न सिर्फ गाड़ी की परफार्मेंस पर असर पड़ता है बल्कि कई बार खतरनाक एक्सीडेंट्स की वजह भी यही नकली पार्ट्स बनते हैं। हाल ही में होंडा टूव्हीलर्स ने ऐसे नकली पार्ट्स बनाने वालों पर छापेमारी की थी, जिसमें होंडा के स्कूटर्स और बाइक्स में लगाए जा सकने वाले तीन करोड़ के नकली कलपुर्जे बरामद किए थे।

20 फीसदी एक्सीडेंट्स की वजह होते हैं ये कलपुर्जे-

पिछले साल आई Ficci-Cascade की रिपोर्ट के मुताबिक देश में होने वाले 20 फीसदी रोड एक्सीडेंट्स की वजह नकली ऑटो पार्ट्स होते हैं। 80 फीसदी लोगों को असली और नकली का अंतर नहीं पता होता है और वो इन्हें असली समझ बैठते हैं। इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नकली पार्ट्स के बिजनेस के चलते सरकार को 2,200 करोड़ रुपये के टैक्स का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

लगातार बढ़ रहा है नकली पार्ट्स का कारोबार-

ऑथेंटिकेशन सॉल्यूशन प्रोवाडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नकुल पसरीचा का कहना है कि ऑफ्टर मार्केट सेगमेंट में नकली ऑटो पार्ट्स की भरमार है। रिटेल मार्केट में नकली कंपोनेंट्स की हिस्सेदारी 30 से 40 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

इस खास तकनीक से कर सकते हैं पहचान-

मोटर व्हीकल नियमों के तहत सरकार ने हाल ही में एक नोटिफिकेशन जारी किया है। जिसमें सरकार ने वाहन और उनके स्पेयर पार्ट्स और अन्य कलपुर्जों में दिखाई न देने वाले माइक्रोडोट्स लगाने का फैसला किया है। इन माइक्रोडोट्स की खासियत होगी कि इन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी या अल्ट्रा वायलेट रेज की जरूरत होगी। इस तकनीक से गाड़ियों में नकली पार्ट्स के इस्तेमाल के साथ गाड़ी की चोरी पर रोकने में भी मदद मिलेगी।

ये माइक्रोडॉट्स सूक्ष्म आकार के कण होंगे, जिनमें मार्किंग और खास संख्या दर्ज है। वहीं माइक्रोडॉट्स की यूनीक आईडी को कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ जोड़ा जाता है। इस तकनीक के जरिये गाड़ी का करीब-करीब हर हिस्सा रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ जुड़ जाता है। अगर गाड़ी के टुकड़े-टुकड़े भी कर दिए जाएं, तो भी इसके रजिस्ट्रेशन नंबर का पता चुटकियों में लगाया जा सकता है।

इस तरह से कर सकते हैं पहचान-

कंपनी के ओरिजनल प्रोडक्ट्स पर यूनिक पार्ट्स आइडेंटिफिकेशन कोड लिखा होता है। इसके अलावा पार्ट्स की पैकेजिंग में अदृश्य इंक प्रिंटेड का भी इस्तेमाल होता है। जैसे हीरो कंपनी का GENUINE PARTS लोगो अल्ट्रा वायलेट (यूवी) लाइट में भी दिखाई देता है। इसमें थर्मोक्रोमिक इंक (ब्लैक कलर) से ‘GENUINE’ शब्द लिखा रहता है। इसे रगड़ने पर ये गायब हो जाता है लेकिन कुछ देर के बहाद फिर दिखाई देने लगता है।

इस तरह बचें नकली पार्ट्स के जाल से-

लेकिन अभी इस टेक्नोलॉजी के आने में थोड़ा वक्त लगेगा इसलिए तब तक कुछ बातों का ख्याल रख आप नकली पार्ट्स से बच सकते हैं।

इन तीन बातों का ख्याल रख आप नकली पार्ट्स से बच सकते हैं।

Updated on:
18 Aug 2019 02:41 pm
Published on:
18 Aug 2019 02:38 pm
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