कार या मोटरसाइकिल खरीदते वक्त कंपनियां ऑफर करती है Extended Warranty वारंटी से अलग होती है Extended Warranty
नई दिल्ली: आपने भी नोटिस किया होगा कि कार बेचते वक्त अक्सर कंपनियां वारंटी देने की बात करती हैं। और कई बार कंपनियां स्टैंडर्ड से ज्यादा वारंटी देने की बात करते हैं जिसके लिए वो आपसे कुछ पैसे भी लेते हैं। वारंटी का मतलब होता है सेलर की ओर से दिया गया एक लीगल डॉक्यूमेंट जो कंपनी की ओर से कस्टमर ( Customer ) को किया एक वादा होता है । जिससे आपके वाहन के ठीक से काम नहीं करने पर आप उसे रिपेयर करा सकते हैं या फिर चेंज भी करा सकते हैं। वो भी बिना किसी एकस्ट्रा चार्ज के
हालांकि कार या मोटरसाइकिल ( motorcycle ) लेने से पहले यह जांच लेना जरूरी है कि कंपनी आपको कितने साल की गारंटी दे रही है। कुछ कंपनियां 1 साल तो कुछ 2 साल की गारंटी देती हैं । आमतौर पर कंपनियां मात्र 1 साल की वारंटी देती है जिसे आप बढ़वाया भी सकते हैं।
वारंटी तो ठीक है लेकिन एक्सटेंडेड वारंटी आपके काम की है भी या नहीं ये एक बड़ा सवाल है क्योंकि इसमें न तो आपका इंजन कवर होता है न ही कोई प्रमुख पार्ट। यह वारंटी सिर्फ अचानक से खराब हुए पार्ट को कवर करती है। इसलिए जरूरी है कि आप देख लें कि आपका क्या-क्या पार्ट कवर हो रहा है।
इसीलिए जब भी आपको एक्सटेंडेड वारंटी के बारे में बताया जाए तो न सिर्फ ध्यान से सुनें बल्कि आप अपने डाउट्स के बारे में पूछें क्योंकि कई बार एक्साइटमेंट की वजह से बहुत सी चीजें ऐसी होती है जिन पर हमारा ध्यान उस समय तो नहीं जाता लेकिन जैसे-जैसे आपकी कार पुरानी होती जाती है आपको याद आता है । शायद यह भी रह गया वो भी रह गया। तो इसलिए बेहतर है कि एक्सटेंडेड वारंटी में पैसे लगाने से पहले सारी जानकारी पक्की कर लें।