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पीएम मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात, केजरीवाल बोले-ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे

PM Modi And Sukhbir Badal : पंजाब चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद बीजेपी और अकाली दल के बीच गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं। इस पर अरविंद केजरीवाल ने तंज कसते हुए प्रतिक्रिया दी है।
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PM Modi And Sukhbir Badal
PM Modi And Sukhbir Badal (Photo IANS)

नई दिल्ली। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले क्या पुराने सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) फिर से हाथ मिलाने जा रहे हैं? शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच संसद भवन में हुई मुलाकात के बाद दोनों दलों के बीच गठबंधन की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक के एजेंडे में गठबंधन को लेकर बातचीत भी शामिल थी। दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे। उन्होंने आरोप लगाया कि क्या क्या चंदा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है।

2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूटा था 25 साल पुराना नाता

भाजपा और अकाली दल का करीब ढाई दशक पुराना गठबंधन वर्ष 2020 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में टूट गया था, जिसके बाद अकाली दल एनडीए से अलग हो गया था। इसके बाद दोनों दलों ने 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा राज्य में एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि अकाली दल को महज एक सीट से ही संतोष करना पड़ा था।

गठबंधन को लेकर क्या हैं राजनीतिक समीकरण?

एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से कहा कि अकाली दल, पंजाब भाजपा की प्रदेश इकाई और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) दोनों दलों के साथ आने के पक्ष में हैं। सूत्रों ने आगे कहा कि कांग्रेस से बीजेजी में शामिल हुए नेता भी गठबंधन को बहाल करने के पक्ष में हैं। हालांकि अंतिम फैसला बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को लेना है। दिलचस्प बात यह है कि गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल मार्च में मोगा शहर के दौरे के दौरान अकाली दल के साथ गठबंधन की संभावना को साफ तौर पर खारिज कर दिया था।

जानकारों का मानना ​​है कि इस गठबंधन से दोनों पार्टियों को फायदा होगा, क्योंकि राज्य के शहरी क्षेत्रों में भाजपा का आधार है, जबकि ग्रामीण पंजाब में अकाली दल का प्रभाव है। हालांकि, भाजपा अब राज्य में बराबर की हैसियत से गठबंधन चाहती है, जबकि पहले वह 'छोटे भाई' की भूमिका में रहती थी। भाजपा नेता लंबे समय से 2027 का पंजाब चुनाव अकेले लड़ने का दावा कर रहे थे, लेकिन पीएम मोदी और सुखबीर बादल की इस मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में एक बार फिर नए समीकरणों को जन्म दे दिया है।

Updated on:
07 Aug 2026 04:48 pm
Published on:
07 Aug 2026 04:48 pm