चंडीगढ़ पंजाब

जीएसटी से इन तीन सिख तख्तों के लंगर का बजट दस करोड़ रूपए तक बढा

एक साल पहले पहली जुलाई को देशभर में लागू किए गए जीएसटी ने पंजाब के तीन सिख तख्तों के लंगर का बजट करीब दस करोड रूपए बढा दिया है...
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langar file photo
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(चंडीगढ): एक साल पहले पहली जुलाई को देशभर में लागू किए गए जीएसटी ने पंजाब के तीन सिख तख्तों के लंगर का बजट करीब दस करोड रूपए बढा दिया है। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर,आनन्दपुर साहिब के तख्त श्रीकेशगढ साहिब और तलवण्डी साबो के तख्त दमदमा साहिब के लंगर का खर्च जीएसटी लागू होने के बाद इस पहली जुलाई को पूरे हुए एक साल में दस करोड रूपए बढ गया। तीनों तख्त के लंगर पर सालाना करीब 75 करोड रूपए खर्च होते है।


शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी को इस एक साल में स्वर्ण मंदिर के लंगर पर 3.8 करोड रूपए पिछले सालों के बजट से अधिक खर्च करने पडे है। स्वर्ण मंदिर का लंगर दुनिया की सबसे बडी भोजनशाला के रूप में शुमार है। इस लंगर से रोजाना 55 से 60 हजार तक लोगों को निःशुल्क भोजन प्रसाद रूप में कराया जाता है।


लंगर के सामान का पुनर्भुगतान करेगी केंद्र सरकार

शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी और प्रदेश के सभी राजनीतिक दलों की मांग पर केन्द्र सरकार ने सिख लंगरों को जीएसटी से राहत देने के लिए सेवा भोज योजना लागू की है। केन्द्र सरकार ने पिछले एक जून को ही सेवा भोज योजना लागू करने का ऐलान किया था। योजना के अनुसार केन्द्र सरकार सिख लंगरों द्वारा खाद्य सामग्री की खरीद पर चुकाए जाने वाले जीएसटी में केन्द्र के हिस्से का पुनर्भुगतान कर देगी। यह योजना दो वर्षों 2018-19 और 2019-20 के लिए है। इसका बजट 325 करोड रूपए रखा गया है। यह पुनर्भुगतान लंगर के लिए कुछ क्षास वस्तुओं की खरीद पर ही किया जाएगा। अभी उन वस्तुओं के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है।

शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के अधिकारियों के अनुसार अभी तक लंगर की खाद्य सामग्री पर जीएसटी का भुगतान किया जा रहा है। पुनर्भुगतान के बारे में अभी तक आधिकारिक रूप से प्रक्रिया भी स्पष्ट नहीं की गई है। श्रद्वालुओं द्वारा दी जाने वाली खाद्य सामग्री के अलावा लंगर के लिए खुली टेण्डर प्रक्रिया से खरीद की जाती है। अमृतसर और आसपास के अलावा दिल्ली से खाद्य सामग्री की खरीद की जाती है।

Published on:
07 Jul 2018 04:17 pm