
Punjab Drug Crisis:पंजाब के संगरूर में नशे के मुद्दे को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। जिले में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों से जुड़े दो मामलों के बाद विपक्ष ने आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठाए हैं। शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने इन घटनाओं का जिक्र करते हुए पंजाब सरकार को घेरा है।
मजीठिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संगरूर से जुड़े कई मामलों का जिक्र किया। उन्होंने मोहांजीत शेरों, गुलजार सिंह और अब जगसीर सिंह के मामलों को सामने रखते हुए सरकार से सवाल किए। मजीठिया का आरोप है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की शिकायतों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जा रहा।
ताजा मामला संगरूर के नामोल गांव के रहने वाले जगसीर सिंह से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, जगसीर ने संगरूर के मिनी सचिवालय के पास जहरीला पदार्थ खा लिया। उनके दोस्त ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। बाद में उन्हें इलाज के लिए पटियाला रेफर किया गया।
जगसीर ने आरोप लगाया है कि उनके गांव में नशे की बिक्री को लेकर उन्होंने आवाज उठाई थी। उनका दावा है कि शिकायत के बाद उन्हें धमकियां दी गईं और उनके साथ मारपीट भी हुई। उनके दोस्त ने भी आरोप लगाया कि जगसीर के पास नशे की बिक्री से जुड़े कुछ वीडियो थे। हालांकि, इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, डॉक्टरों की मंजूरी के बाद जगसीर का बयान दर्ज किया जाएगा।
इससे पहले संगरूर के तूर बंजारा गांव के रहने वाले गुलजार सिंह की जहरीला पदार्थ खाने के बाद मौत हो गई थी। गुलजार ने एक कार्यक्रम में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने इलाके में नशे की समस्या का मुद्दा उठाया था। उनके परिवार ने आरोप लगाया था कि इसके बाद उन पर दबाव बनाया गया। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया है और जांच चल रही है।
गुलजार सिंह के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगी थी। आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी समेत अधिकारियों से मामले की जानकारी और अब तक की कार्रवाई का ब्योरा मांगा था।
इसी घटनाक्रम को लेकर मजीठिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि नशे की समस्या को लेकर शिकायत करने वाले लोगों की बात नहीं सुनी जा रही और उन्हें मदद के लिए भटकना पड़ रहा है।
दूसरी ओर, पंजाब बीजेपी ने भी इन मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की शिकायतों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अलग पक्ष रखा गया है और मामलों की जांच जारी है। ऐसे में अब पुलिस जांच और सामने आने वाले तथ्य इस पूरे मामले में आगे की तस्वीर साफ करेंगे।