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सुखबीर सिंह बादल पर 2 साल पहले भी चली थी गोली, जानिए क्यों नाराज हैं सिख?

Sukhbir Singh Badal Controversies: सुखबीर सिंह बादल पर नांदेड़ में हुए हमले के बाद जानें उनके राजनीतिक करियर के सबसे बड़े विवाद। डेरा राम रहीम को माफी, 2015 बड़गड़ी बेअदबी कांड से लेकर स्वर्ण मंदिर में हुए जानलेवा हमले और अकाल तख्त की सजा तक की पूरी टाइमलाइन।
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Sukhbir Singh Badal Controversies
कब-कब विवादों में रहे सुखबीर सिंह बादल?

Sukhbir Singh Badal Attack News: पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। महाराष्ट्र के नांदेड़ में तख्त श्री हजूर साहिब के दर्शन के दौरान उन पर हुए हमले के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब सुखबीर सिंह बादल पर हमला हुआ हो, करीब 2 साल पहले अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के बाहर भी उन पर जानलेवा हमला हुआ था।

पंजाब की राजनीति के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक सुखबीर सिंह बादल का राजनीतिक करियर उपलब्धियों के साथ-साथ गंभीर विवादों और अकाल तख्त से मिली धार्मिक सजाओं से भी घिरा रहा है। आइए जानते हैं सुखबीर सिंह बादल से जुड़े उन बड़े विवादों और बीते हमलों के बारे में, जिन्होंने पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया।

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को माफी (2007-2015)

साल 2007 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी का स्वांग (नकल) रचने का गंभीर आरोप लगा था। इसके बाद अकाली दल और तत्कालीन राज्य सरकार के हस्तक्षेप से अकाल तख्त द्वारा राम रहीम को माफी दी गई थी। सुखबीर सिंह बादल पर आरोप लगा कि उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए इस माफी में मुख्य भूमिका निभाई और एसजीपीसी (SGPC) के कोष का इस्तेमाल कर राम रहीम के पक्ष में विज्ञापन जारी करवाए। लंबे समय बाद, 2024 में अकाल तख्त के समक्ष पेश होकर सुखबीर ने अपनी इस भूमिका को स्वीकार किया।

बड़गड़ी बेअदबी कांड और पुलिस फायरिंग (2015)

पंजाब के इतिहास का सबसे संवेदनशील मामला 2015 का बड़गड़ी बेअदबी कांड है। दरअसल, जून 2015 में बुरज जवाहर सिंह वाला से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप चोरी हुआ, जिसके बाद विवादित पोस्टर लगाए गए और अक्टूबर में बड़गड़ी में पावन अंग बिखरे मिले। इसके विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर 14 अक्टूबर 2015 को बेहबल कलां और कोटकपूरा में पुलिस ने गोलियां चलाईं, जिसमें दो सिख युवकों की मौत हो गई और कई घायल हुए। उस वक्त सुखबीर सिंह बादल राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री थे। उन पर मामलों की जांच में ढिलाई बरतने और दोषियों को बचाने के गंभीर आरोप लगे। इस मामले में SIT ने 2026 तक सुखबीर बादल से कई दौर की पूछताछ की है।

विवादित पुलिस अधिकारियों की नियुक्तियां

सुखबीर सिंह बादल पर सिख समुदाय की भावनाओं के खिलाफ जाकर कई विवादित अधिकारियों को संरक्षण देने का आरोप लगा कि 1990 के दशक में मानवाधिकार उल्लंघन और फर्जी एनकाउंटर के आरोपों से घिरे सुमेध सिंह सैनी को पंजाब का पुलिस महानिदेशक (DGP) बनाया गया। इतना ही नहीं पूर्व आईपीएस अधिकारी इजहार आलम की पत्नी फरजाना आलम को अकाली दल से टिकट देकर मंत्री पद का दर्जा दिया गया। सिख पंथ में 'आलम सेना' को लेकर भारी रोष था।

अकाल तख्त द्वारा 'तनखैया' घोषित और स्वर्ण मंदिर के बाहर हमला (2024-2025)

2007 से 2017 के अकाली दल शासन के दौरान हुई 'भूलों' के कारण सर्वोच्च सिख धार्मिक पीठ अकाल तख्त ने अगस्त 2024 में सुखबीर सिंह बादल को 'तनखैया' (धार्मिक रूप से दोषी) घोषित कर दिया। दिसंबर 2024 में अकाल तख्त ने उन्हें गले में तख्ती लटकाकर स्वर्ण मंदिर के बाहर पहरा देने, श्रद्धालुओं के जूते साफ करने और बर्तन धोने की धार्मिक सजा सुनाई।

2 साल पहले हुआ जानलेवा हमला

गौरतलब है कि 4 दिसंबर 2024 को जब सुखबीर सिंह बादल स्वर्ण मंदिर के बाहर सेवादार की पोशाक में ड्यूटी दे रहे थे, तभी नारायण सिंह चौरा नाम के एक शख्स ने उन पर गोली चला दी थी। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए हमलावर को मौके पर ही दबोच लिया था और सुखबीर बादल बाल-बाल बच गए थे। इसके बाद 2025 में समन की अनदेखी करने पर तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब ने भी उन्हें 'तनखैया' घोषित किया था।

बता दें कि सुखबीर सिंह बादल पर नांदेड़ में हुआ ताजा हमला इसी सिलसिले की एक और कड़ी माना जा रहा है, जिसने एक बार फिर उनके राजनीतिक सफर और उनसे जुड़े विवादों को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।

Updated on:
13 Aug 2026 03:31 pm
Published on:
13 Aug 2026 03:31 pm