
तमिलनाडु में छात्रों के पहचान पत्र (ID Card) में जाति विवरण जोड़ने की खबरों के बीच, राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब छात्रों के ID कार्ड में जाति से संबंधित कोई जानकारी नहीं होगी। शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन और राजस्व मंत्री केए सेंगोट्टैयन ने कहा कि यह निर्णय भेदभाव की संभावना को रोकने के लिए लिया गया है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सेंगोट्टैयन ने ईरोड जिले के गोबिचेट्टीपालयम में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग मिलकर छात्रों के लिए ऐसे पहचान पत्र जारी करने की योजना बना रहे हैं, जिनमें पता, ब्लड ग्रुप, आधार जानकारी और कक्षा का विवरण होगा। लेकिन इनमें जाति की जानकारी शामिल नहीं की जाएगी। मंत्री ने कहा कि अगर जाति का उल्लेख किया गया तो इससे छात्रों के बीच भेदभाव की स्थिति बन सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी जाति और धर्म से ऊपर है।
चेन्नई में प्रेस वार्ता के दौरान शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने कहा कि सेंगोट्टैयन ने शुक्रवार को सिर्फ इतना कहा था कि समुदाय प्रमाण पत्र (Community Certificate) अब टिकाऊ कार्ड फॉर्मेट में जारी किए जाएंगे। पहले ये प्रमाण पत्र कागज पर दिए जाते थे, जो बाढ़ जैसी आपदाओं में खराब हो जाते थे। अब इन्हें कार्ड के रूप में दिया जाएगा, लेकिन इनका छात्रों के आइडी कार्ड से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका सिद्धांत है कि जन्म से सभी समान हैं और किसी की कोई जाति नहीं है।
पूर्व शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी ने आरोप लगाया कि सरकार केंद्र की योजना को लागू कर रही है, जिससे छात्रों की निजी जानकारी केंद्र सरकार के साथ साझा हो सकती है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विरोध जारी रखने की मांग की। वहीं, सीपीआइ के राज्य सचिव आर मुत्तरसन की आलोचना पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को जनादेश का सम्मान करना चाहिए। इसके साथ ही सेंगोट्टैयन ने अन्य सरकारी नियुक्तियों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि प्रतिनिधियों की नियुक्ति सरकार का नीति निर्णय है।
सरकार की इस घोषणा के बाद अब तमिलनाडु के स्कूल छात्रों के पहचान पत्र में जाति विवरण नहीं जोड़ा जाएगा। इससे छात्रों के बीच किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकने का प्रयास किया गया है। साथ ही, समुदाय प्रमाण पत्र को भी टिकाऊ कार्ड फॉर्मेट में जारी किया जाएगा, जिससे आपदा के समय दस्तावेज सुरक्षित रह सकें।