
चेन्नई। हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ विभाग ने राज्य के सभी प्रमुख मंदिरों में 1 सितंबर से मोबाइल फोन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। विभाग ने साथ ही अभिनेताओं, राजनीतिक नेताओं और अन्य प्रमुख हस्तियों के मंदिर दौरे के लिए नई सख्त प्रक्रियाएं लागू की हैं। मंत्री रमेश के निर्देश पर जारी आदेश में कहा गया है कि मंदिरों को किसी भी वीआइपी दौरे की सूचना कमिश्नर को कम से कम एक दिन पहले देनी होगी। अगर दौरा अचानक तय हो, तो तत्काल जानकारी देना अनिवार्य होगा।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि वीआइपी यात्राओं के दौरान आम श्रद्धालुओं के दर्शन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए और मंदिर परिसर में फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं दी जाएगी। मोबाइल फोन प्रतिबंध का उद्देश्य मंदिर की पवित्रता बनाए रखना और देवताओं व गर्भगृह की अनधिकृत तस्वीरें या वीडियो बनने से रोकना है। बता दें कि यह कदम मंदिरों में फोटो, वीडियो, सेल्फी और सोशल मीडिया रील बनाने की शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया है। विभाग के अनुसार मोबाइल से फोटो और वीडियो बनाने से दूसरे श्रद्धालुओं को परेशानी होती है और मंदिर का धार्मिक माहौल भी प्रभावित होता है। नए नियम के तहत श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश से पहले अपना मोबाइल जमा करना होगा।
वहीं मंदिर प्रशासन को 20 दिनों में सुरक्षित मोबाइल जमा केंद्र स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। प्रवेश द्वारों पर स्पष्ट नोटिस लगाए जाएंगे। श्रद्धालुओं को दर्शन से पहले फोन जमा करना होगा और बाद में रसीद दिखाकर वापस लेना होगा। प्रति फोन शुल्क 5 रुपए तय किया गया है, जिसकी रसीद आइटीएमएस प्रणाली से जारी होगी। जमा केंद्रों का संचालन स्वयंसेवक या नियुक्त कर्मचारी करेंगे और सीसीटीवी से निगरानी होगी। मंदिर प्रशासन को नियम तोड़ने वालों पर नजर रखने के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती करने के निर्देश दिए गए हैं। बिना अनुमति फोटो या वीडियो बनाने वालों पर जरूरत पड़ने पर पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है।
वीआईपी के साथ मंदिर के अंदर केवल उन्हीं लोगों को जाने की अनुमति होगी, जिन्हें पहले से अनुमति मिली हो या जिनकी सुरक्षा और प्रशासनिक काम के लिए मौजूदगी जरूरी हो। वीआईपी के आने-जाने की व्यवस्था इस तरह करनी होगी कि आम श्रद्धालुओं को परेशानी न हो और मंदिर की पूजा-पद्धति प्रभावित न हो। विभाग ने अधिकारियों को इन नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। नियम लागू नहीं कराने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।