bageshwar dham: कन्या विवाह महोत्सव में 60 अनाथ, 138 पितृ हीन, 28 मातृहीन, आठ दिव्यांग, 23 दिव्यांग माता-पिता की बेटियां बनेंगी दुल्हन।
bageshwar dham: देश-दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बन चुके मध्यप्रदेश के छतरपुर के बागेश्वर धाम में एक पखवाड़ा बाद फिर से शहनाइयां गूंजने वाली हैं। बागेश्वर धाम की दान पेटी में आने वाली चढ़ोत्तरी से पीठाधीश पं. धीरेंद्र शास्त्री हर वर्ष गरीब, अनाथ, मातृहीन, पितृहीन, अत्यंत निर्धन बेटियों को विवाह कराते हैं। इस साल भी शिवरात्रि के अवसर पर बागेश्वर धाम में कन्या विवाह महोत्सव होगा जिसमें 300 बेटियों का विवाह कराया जाएगा। जिन बेटियों की शादी कराई जाएगी उनकी सूची जारी कर दी गई है।
इस साल शिवरात्रि पर होने वाले सप्तम कन्या विवाह महोत्सव में बागेश्वर धाम में 300 बेटियों का विवाह कराया जाएगा। जिन 300 बेटियों का विवाह महोत्सव में कराया जाएगा वो मध्यप्रदेश के साथ ही नेपाल सहित देश के 9 राज्यों के अलग अलग जिलों की रहने वाली हैं। इन बेटियों में 60 ऐसी बेटियां हैं जो अनाथ हैं। इसके अलावा 138 बेटियां पितृ हीन हैं। साथ ही 28 बेटियां मातृ हीन हैं। 8 ऐसी बेटियां हैं जो दिव्यांग हैं। वहीं 23 दिव्यांग माता-पिता की बेटियां भी इस विवाह में शामिल होकर अपना नया जीवन शुरू करेंगी। 39 बेटियां उन परिवारों की हैं जो अत्यंत निर्धन है।
बागेश्वर महाराज धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि बागेश्वर धाम की दान पेटी में जो भी राशि प्राप्त होती है वह इन बेटियों के विवाह में खर्च की जाती है। उन्होंने कहा कि देशभर के मठ, मंदिरों से अगर इस तरह का चलन शुरू हो जाए तो न केवल गरीब बेटियों का घर बसेगा बल्कि कोई भी व्यक्ति बेटी को बोझ नहीं मानेगा। देश के 10 राज्यों के 60 जिलों की बेटियां परिणय सूत्र में इस साल बंधेंगी। एक बेटी नेपाल से भी बागेश्वर धाम विवाह करने आ रही है। बेटी का विवाह नेपाल में ही हो रहा है। कन्या और वरपक्ष की ओर से बागेश्वर धाम आकर 1 दिसंबर से 15 दिसंबर के बीच सभी दस्तावेजों सहित फॉर्म जमा किए गए थे इसलिए उनका चयन किया गया है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और बिहार की बेटियां वैवाहिक बंधन में बंधकर अपना नया जीवन शुरू करेंगी। इस विवाह में मध्य प्रदेश की 229 और उत्तर प्रदेश की 56 बेटियां शामिल हो रही हैं।