MP News: सूखे से जूझते बुंदेलखंड में बदलाव की सबसे बड़ी शुरुआत एमपी के जिले से होने वाली है। दो नदियों को जोड़ने की परियोजना 688 गांवों को सिंचाई देकर खेती, रोजगार और भविष्य की तस्वीर बदलने जा रही है।
Bundelkhand development: बुंदेलखंड के दिल माने जाने वाले छतरपुर जिले की किस्मत अब बदलने जा रही है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के पहले चरण में छतरपुर को प्रदेश में सबसे बड़ा लाभार्थी जिला माना जा रहा है। जिले की 10 तहसीलों के कुल 688 ग्रामों में फैली लगभग 416942 हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलने की घोषणा ने किसानों और ग्रामीण इलाकों में नई उम्मीद जगा दी है। जल संकट, सूखे और पलायन से जूझ रहा छतरपुर अब जल-कृषि-रोजगार के नए युग में प्रवेश करने की तैयारी में है। (MP News)
छतरपुर जिले में वर्षों से अनियमित बारिश, बरसाती तालाबों पर निर्भरता, तेजी से घटते जलस्तर और खेती पर बढ़ता जोखिम किसानों को लगातार परेशान करता रहा है। कई तहसीलों में रबी सीजन की सिंचाई लगभग असंभव हो जाती है। ऐसे में 4.16 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई मिलना न सिर्फ फसल उत्पादन बढ़ाएगा बल्कि किसान की आय दोगुनी करने, सिंचाई आधारित रोजगार बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि बुंदेलखंड में पहली बार ऐसा कुछ हो रहा है. जिसमें पानी को लेकर स्थायी समाधान दिख रहा है। गौरिहार, चंदला और बड़ामलहरा क्षेत्रों के किसानों में इससे जुड़े लाभको लेकर खास उत्साह देखने मिल रहा है। स्थायी जल संकट की मार झेल रहे इन क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि अगर हमारे खेतों में सालभर पानी मिले तो न पलायन करना हमारी मजबूरी होगी, न कर्ज में डूबेंगे। खेती फिर से जी उठेगी।
केंद्र और राज्य सरकार दोनों इस परियोजना को बुंदेलखंड की लाइफलाइन बताने लगे हैं। केन नदी पर ढोढन बांध. 218 किलोमीटर लंबी लिंक नहर और दो पावर स्टेशन तैयार होने से पूरा क्षेत्र जल, सिंचाई और बिजली तीनों मामलों में मजबूत होगा। परियोजना पूरी होने पर छतरपुर न केवल बुंदेलखंड में सबसे बड़ा कृषिगत लाभार्थी जिला बनेगा, बल्कि जल संकट से मुक्त होने वाले पहले जिलों में भी शामिल हो जाएगा।
केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project) छतरपुर जिले को अगले एक दशक में एक नए कृषि और विकास मॉडल में बदल सकती है। 688 ग्राम, 10 तहसीलों और 4.16 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलना यह साबित करता है कि आने वाले वर्षों में छतरपुर बुंदेलखंड की आर्थिक रीढ़ बनने जा रहा है।
गौरिहार- 73700 हेक्टेयर- सबसे बड़ा सिंचाई क्षेत्र। यहां पथरीले खेतों में पहली बार बड़े पैमाने पर व्यवस्थित सिंचाई हो सकेगी।
छतरपुर - 69117 हेक्टेयर- मुख्यालय क्षेत्र में खेती की निर्भरता पूरी तरह बदल जाएगी। सब्जी, बागवानी और दोहरी फसल का विस्तार संभव।
बड़ामलहरा एवं राजनगर- 58 हजार हेक्टेयर से अधिक - अनियमित वर्षा से बुरी तरह प्रभावित इन दोनों क्षेत्रों में यह परियोजना कृषि क्रांति जैसा बदलाव ला सकती है। (MP News)