
Chhatarpur news: ब्रेस्ट में गांठ महसूस होने के बाद भी जांच कराने में झिझक, बीमारी का नाम सुनते ही मन में पैदा होने वाला डर और परिवार के सामने अपनी परेशानी बताने का संकोच महिलाओं के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में समय पर पहचान और उपचार बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन जागरूकता की कमी और सामाजिक झिझक कई बार महिलाओं को जांच कराने में देर करने पर मजबूर कर देती है। जिले में 800 से अधिक महिलाओं के कैंसर से जूझने की जानकारी सामने आई है। इनमें करीब 25 फीसदी स्तन कैंसर की मरीज बताई जा रही हैं। ऐसे में बीमारी की पहचान से लेकर उपचार तक की सुविधाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर तब, जब स्थानीय स्तर पर स्क्रीनिंग के बाद आगे के इलाज के लिए मरीजों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।
चिकित्सकों का कहना है कि स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता की कमी और संकोच के चलते कई महिलाएं अपनी परेशानी खुलकर साझा नहीं कर पातीं। स्तन में गांठ, आकार या त्वचा में बदलाव, अंदर की ओर खिंचना अथवा असामान्य स्राव जैसे लक्षण सामने आने पर भी कुछ महिलाएं इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। कई बार परिवार की जिम्मेदारियां, आर्थिक परेशानी और अस्पताल जाने में होने वाली असुविधा भी जांच में देरी का कारण बनती हैं। हालांकि, इन लक्षणों का होना अपने आप में कैंसर की पुष्टि नहीं है, लेकिन किसी नए या असामान्य बदलाव पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
कैंसर की आशंका होने पर स्क्रीनिंग शुरुआती कदम है। इसके बाद जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह, पुष्टि के लिए जांच और समय पर उपचार आवश्यक होता है। यदि जिले में सभी जरूरी जांच और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो मरीजों को दूसरे शहरों में जाना पड़ सकता है। इससे आने-जाने, रहने और इलाज का खर्च बढ़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति और कठिन हो जाती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जांच के बाद मरीजों को कहां भेजा जाता है, उपचार की कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ कितनी आसानी से मिल रहा है, इसकी पड़ताल जरूरी है।
डॉ आरपी गुप्ता, सीएमएचओ का कहना है कि स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास्ता किए जा रहे हैं। जिले में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से महिलाओं को बीमारी के लक्षणों और समय पर जांच की जानकारी दी जाती है। स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ाने पर भी फोकस किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज शुरू होने से सुविधाओं के विस्तार और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।