कई वार्डों में नलों से आने वाला पानी बदबूदार, मटमैला और नाली के पानी जैसा बताया जा रहा है। इसके बावजूद न तो टंकी की नियमित सफाई कराई गई और न ही पाइपलाइन बदलने की ठोस पहल हुई।
जिले में पेयजल व्यवस्था की हकीकत लगातार प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही है। हरपालपुर नगर परिषद की घोर लापरवाही अब सीधे-सीधे आमजन की सेहत के लिए खतरा बन चुकी है। नगर की प्यास बुझाने वाली 50 हजार गैलन क्षमता की पानी की टंकी निर्माण के बाद से आज तक एक बार भी साफ नहीं की गई। बीते 12 वर्षों से टंकी की सफाई न होना और करीब 30 साल पुरानी जर्जर पाइपलाइन के सहारे घर-घर पानी पहुंचाया जाना, नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
नगर के कई वार्डों में नलों से आने वाला पानी बदबूदार, मटमैला और नाली के पानी जैसा बताया जा रहा है। इसके बावजूद न तो टंकी की नियमित सफाई कराई गई और न ही पाइपलाइन बदलने की ठोस पहल हुई। मजबूरी में लोग इसी दूषित पानी का उपयोग पीने, खाना बनाने और रोजमर्रा के कामों में कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार हरपालपुर की प्रमुख पानी की टंकी वर्ष 2014 में बनाई गई थी। इसके बाद न तो किसी प्रकार का मेंटेनेंस हुआ और न ही स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी जांच। टंकी की दीवारों पर काई, गंदगी और जंग की परतें जम चुकी हैं, लेकिन इसी टंकी से पूरे नगर को पानी सप्लाई किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार नगर परिषद में शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया।
नगर में इस्तेमाल हो रही पेयजल पाइपलाइन लगभग 30 साल पुरानी है। कई स्थानों पर पाइपलाइन फूट चुकी है और कई वार्डों में यह पाइप नालियों के भीतर से गुजर रही है। लीकेज होने पर नाली का गंदा पानी सीधे सप्लाई लाइन में मिल जाता है। लोगों का आरोप है कि बीते कुछ महीनों में पेट दर्द, उल्टी-दस्त, त्वचा रोग और बुखार के मामलों में इजाफा हुआ है, लेकिन इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया गया।
हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद जिले के अधिकारी हरकत में आए। कलेक्टर के निर्देश पर हरपालपुर, नौगांव सहित अन्य क्षेत्रों में जलस्त्रोतों और टंकियों से पानी के सैंपल लिए गए। हालांकि नगरवासियों का कहना है कि जब तक टंकी की सफाई, पाइपलाइन का बदलाव और नियमित निगरानी नहीं होगी, तब तक सिर्फ सैंपल लेना दिखावटी कार्रवाई ही साबित होगी।
हरपालपुर में पाइपलाइन लीकेज तलाशने के लिए कई स्थानों पर खुदाई की गई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका कि गंदा पानी सप्लाई लाइन में कहां से मिल रहा है। कई जगह सड़कों और गलियों को खोदकर छोड़ दिया गया, जिससे आवागमन में भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
नगर परिषद हरपालपुर के उपयंत्री गगन सूर्यवंशी ने स्वीकार किया कि टंकी की सफाई 2014 से नहीं हुई है और टंकी जर्जर हालत में है। उन्होंने बताया कि टंकी को मुख्यमंत्री जलावर्धन योजना में शामिल किया गया है और सैंपलिंग की जा रही है। लेकिन नगरवासियों का कहना है कि जब तक नियमित सफाई, पुरानी पाइपलाइन को हटाकर नई लाइन बिछाने और सख्त निगरानी की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक स्थिति में सुधार संभव नहीं है।
हरपालपुर जैसी ही स्थिति नौगांव नगर परिषद क्षेत्र में भी देखने को मिल रही है। यहां भी कई इलाकों में वर्षों पुरानी पाइपलाइन के कारण गंदे पानी की शिकायतें आती हैं। सबसे ज्यादा लापरवाही पानी की जांच में की जा रही है। लैब में टैक्नीशियन नहीं होने से बिना जांच पानी सप्लाई हो रहा है। पानी की सफाई के लिए चौकीदार पानी में फिटकरी मिलाते हैं। लेकिन उसकी मात्रा व क्वालिटी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इसके उलट खजुराहो नगर परिषद क्षेत्र में नई पेयजल पाइपलाइन बिछाए जाने के बाद हालात में सुधार देखने को मिला है। यहां नई लाइन के माध्यम से घरों तक अपेक्षाकृत साफ और शुद्ध पानी पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले गंदे पानी की समस्या आम थी, लेकिन नई पाइपलाइन के बाद शिकायतें काफी हद तक कम हुई हैं।
हरपालपुर और नौगांव में लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि दूषित पानी से कोई बड़ी अनहोनी होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? खजुराहो की तरह यदि बाकी नगरों में भी नई पाइपलाइन और बेहतर व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।