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MP में सरकारी योजना में भ्रष्टाचार! अफसरों ने दबाए लाखों, ऐसे खुला राज

Government Scheme Corruption: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली योजना, अफसरों की कमाई का जरिया कैसे बन गई? बैंक स्टेटमेंट से खुलते राज, मानदेय से लेकर गणवेश तक हर मद में गड़बड़ी।

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Rajasthan Corruption Case

भ्रष्टाचार कभी अकेला नहीं चलता। वह संकेतों की छाया में पलता है।

MP News:छतरपुर के बड़ामलहरा में आजीविका मिशन में भ्रष्टाचार का खेल सामने आया है। नारी शक्ति संकुल स्तरीय मंडल बड़ामलहरा के 1 जनवरी 2024 से 24 जून 2025 तक के बैंक स्टेटमेंट की पड़ताल में साफ हो गया कि मिशन के जिम्मेदार अधिकारियों विखं प्रबंधक प्रेमचंद्र यादव और जिला प्रबंधक श्याम बिहारी गौतम ने सरकारी योजना को अपनी निजी एटीएम मशीन बना लिया।सीआरपी मानदेय, गणवेश वितरण, वितरण, स्वसहायता समूहों और उत्पादन इकाइयों के नाम पर लाखों रुपए का घालमेल किया गया। सबसे पहले सीआरपी यानी कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के मानदेय में गंभीर अनियमितता सामने आई है।

शासन के स्पष्ट निर्देश है कि सीएलपी को अधिकतम चार हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जा सकता है, लेकिन इसके उलट एक मानदेयधारी कर्मचारी अनिता यादव के खाते साल में आठ बार में कुल 3 लाख 14 हजार 445 रुपए जमा कर निकाले गए। भुगतान आजीविका मिशन बड़ामलहरा के प्रबंधक प्रेमचंद्र यादव के कार्यकाल में किया गया। (Government Scheme Corruption)

गणवेश वितरण किसी ने किया, भुगतान दूसरे को

गणवेश निर्माण और वितरण के नाम पर भी फर्जीवाड़ा किया गया। वर्तमान में गणवेश वितरण का ठेका आरआर इंटरप्राइजेज जतारा के पास है, जिसने वास्तविक रूप से गणवेश का निर्माण और वितरण किया। इससे पहले यह ठेका मोदी इंटरप्राइजेज दमोह के पास था। बावजूद अधिकारियों ने संस्कार इंटरप्राइजेज के नाम 5 लाख 56 हजार रुपए का भुगतान कर दिया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि संस्कार इंटरप्राइजेज आजीविका मिशन से जुड़े अधिकारियों की खुद की फर्म है।

पहले उद्योग स्थापना में कर चुके हैं घोटाला

जसगुंवा में 70 लाख से कैटल फीड निर्माण इकाई स्थापित की गई थी, जिसका उद्देश्य रोजगार सृजन था। लेकिन इकाई में न तो एक दाना उत्पादन हुआ और न ही सरकारी ऋण की वसूली की जा रही है।

संचालन खर्च में भी गड़बड़ी

स्वसहायता समूहों की जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज से संचालन और रखरखाव का खर्च निकाला जाना था, लेकिन अधिकारियों ने स्वसहायता समूहों के नाम पर सरकारी राशि निकालकर उसका दुरुपयोग किया।

हर काम में घोटाला

सीएलपी मानदेय, गणवेश वितरण, कैटल फीड इकाई, स्वसहायता समूहों और अन्य मदों को मिलाकर अब तक कुल 27.32 लाख रुपए के घालमेल की पुष्टि दस्तावेजों से होती है। यह पूरा मामला मला महिलाओं के रोजगार, आत्मनिर्भरता और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

यदि समय रहते निष्पक्ष जांच, ऑडिट और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आजीविका मिशन जैसी योजनाएं महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम बनने के बजाय भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह जाएंगी। जिपं सीईओ नमः शिवाय अरजरिया के मुताबिक, मामला संज्ञान में आया है. इसकी जांच करेंगे। जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी। (MP News)

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