
Rainwater Leakage Testing Gadget: बारिश के समय ट्रेन यात्रियों को खिड़की बंद होने के बावजूद सीट पानी के रिसाव का सामना करना पड़ता है। इससे यात्रियों का सफर कठिन हो जाता है। अब इस समस्या से निपटने के लिए भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने नया गैजेट तैयार किया है। अब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर मंडल अंतर्गत परिचालित होने वाली ट्रेनों में अब बारिश में समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। अब मध्य प्रदेश से गुजरने वाली ट्रेनों में यात्री रिसाव मुक्त यात्रा कर सकेंगे।
गोंदिया स्थित कोचिंग डिपो ने यात्रियों को मानसून (Monsoon) के दौरान अधिक सुरक्षित, आरामदायक एवं रिसाव मुक्त यात्रा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। डिपो ने रेलवे यात्री कोचों की छतों एवं खिड़कियों से होने वाले वर्षा जल के रिसाव की सटीक जांच के लिए अत्याधुनिक 'रेनवॉटर लीकेज टेस्टिंग गैजेट' सफलतापूर्वक डिजाइन एवं विकास किया है।
यह नवाचार कोचिंग डिपो के यांत्रिक अनुरक्षण विभाग के सुपरवाइजर एवं कर्मचारियों की टीम द्वारा पूरी तरह विभागीय संसाधनों से (इन-हाउस) विकसित किया गया है। यह गैजेट कोचों में पानी के रिसाव की प्रभावी एवं वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित करता है, जिससे मानसून के दौरान यात्रियों को सुखद, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।
अब तक कोचों में पानी के रिसाव की जांच मुख्यतः मैनुअल वॉटर होज (पाइप) परीक्षण अथवा प्राकृतिक वर्षा पर निर्भर रहती थी। यह प्रक्रिया समय लेने के साथ ही अपेक्षित सटीकता भी प्रदान नहीं कर पाती थी। नव विकसित रेनवाटर लीकेज टेस्टिंग गैजेट नियंत्रित एवं उच्च दाब के साथ कृत्रिम वर्षा जैसा वातावरण तैयार करता है।
इसके माध्यम से कोच की बाहरी सतह पर वास्तविक बारिश के अनुरूप पानी का प्रवाह कराया जाता है। जिससे छत, खिड़कियों अथवा अन्य किसी भी हिस्से से होने वाले सूक्ष्म रिसाव का भी आसानी से पता लगाया जा सकता है। यह यांत्रिक परीक्षण प्रणाली रखरखाव कर्मचारियों को ट्रेन के सेवा में लगाए जाने से पहले ही रिसाव की जांच कर ठीक करने में सक्षम बनाती है।
अधिकारियों का कहना है कि यह गैजेट 100 प्रतिशत रिसाव-मुक्त कोच सुनिश्चित कर यात्रियों एवं उनके सामान को वर्षा के पानी से सुरक्षित रखता है। इसके अलावा नियमित पिट-लाइन अनुरक्षण के दौरान लीकेज परीक्षण में लगने वाले समय को कम करता है। कोचों की आंतरिक विद्युत फिटिंग, सीटों एवं अन्य आंतरिक साज-सज्जा को पानी से होने वाले नुकसान से बचाकर रेलवे परिसंपत्तियों की आयु बढ़ाने में सहायक है।