- महाशिवरात्रि से पहले जा रहे कुंभ - इस साल भूराभगत और पचमढ़ी यात्रा पर दिख रहे कम यात्री
प्रयागराज महाकुंभ होने से इस साल धार्मिक यात्रा का मूड बदल गया है। ज्यादातर परिवार महाशिवरात्रि को समाप्त हो रहे महाकुंभ में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम त्रिवेणी में स्नान करने इच्छुक हैं। इसके चलते सतपुड़ा की सबसे बड़ी यात्रा चौरागढ़ महादेव में श्रद्धालु कम नजर आ रहे हैं। हर कोई सिवनी, जबलपुर, मैहर होते हुए प्रयागराज की यात्रा में दिखाई पड़ रहा है।
इस वर्ष प्रशासन की ओर से 17 फरवरी से 26 फरवरी तक सतपुड़ा अंचल की बड़े महादेव की यात्रा की घोषणा की गई है। इस यात्रा में भूराभगत से 20 किमी पैदल यात्रा है, तो वहीं पचमढ़ी से सीधे सात किमी की पहाड़ी चढ़ाई है। इस यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसमें महाराष्ट्र के श्रद्धालु अधिक हैं। इस यात्रा के शुरुआती दिनों में उत्साह दिखाई नहीं दे रहा है। जबकि पिछले कई साल से इस यात्रा की शुरुआत में ही भक्त त्रिशूल लेकर चौरागढ़ जाते नजर आए हैं। अगले छह दिनों की यात्रा में भी यही माहौल दिखाई देने की संभावना नजर आ रही है। इसका मुख्य कारण प्रयागराज महाकुंभ है, जिसकी यात्रा करने हजारों लोग रोज निकल रहे हैं। उनकी प्राथमिकता प्रयागराज में त्रिवेणी संगम का स्नान है। इससे महादेव यात्रा फीकी पड़ रही है।
पिछले दो माह से प्रयागराज में छिंदवाड़ा से हर दिन हजारों यात्री पहुंचे हैं। इसके साथ ही महाशिवरात्रि तक पहुंचेंगे भी। इसके साथ ही मिर्जापुर, बनारस और अयोध्या की धार्मिक यात्रा भी पूरी कर रहे हैं। यह यात्रा तीन दिन से लेकर एक सप्ताह तक की है। इस यात्रा से लौटने पर थकान हो रही है। इसके चलते इसके यात्रा भी चौरागढ़ पहुंच नहीं पा रहे हैं।
महाराष्ट्र के ज्यादातर यात्री चौरागढ़ महादेव की यात्रा नागपुर महाराष्ट्र से छिंदवाड़ा होकर पूरी करते हैं। इस बार छिंदवाड़ा-नागपुर रेलवे ट्रेक पर पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। इसका पुनर्निर्माण होने तक सारी ट्रेनें रोक दी गई हैं, तो वहीं आमला होते हुए शहडोल-नागपुर एक्सप्रेस जा रही है। इसमें एक घंटा अतिरिक्त समय लग रहा है। इससे भी यात्रियों की संख्या कम है। इसके चलते छिंदवाड़ा, परासिया-जुन्नारदेव जैसे सेंटर में भी यात्रियों की संख्या कम दिखाई दे रही है।