
Pandhurna old man high voltage drama : शहर के तीन शेर चौक स्थित बीएसएनएल के 80 मीटर ऊंचे टावर पर सोमवार शाम से चढ़े बुजुर्ग को आखिरकार शाम को करीब 6.45 बजे सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। पूरे 50 घंटे चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामा का अंत पुलिस प्रशासन और रेस्क्यू टीम की सूझबूझ से हुआ। वृद्ध के नीचे आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली। वह पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर निवासी है। लेकिन वह यह नहीं बता पा रहा है कि वह छिंदवाड़ा संभाग के पांढुर्ना कैसे आया?
बुधवार दोपहर करीब 3 बजे रेस्क्यू टीम के टावर टेक्नीशियन राजा पवार, पुलिस आरक्षक नितेश रघुवंशी और संदीप नामक युवक ऊपर चढ़े थे। राजा पवार को देखते ही बुजुर्ग ने लोहे की रॉड से हमला करने की कोशिश की, लेकिन राजा ने फुर्ती दिखाते हुए रॉड छीनकर नीचे फेंक दी। इसके बाद संदीप की मदद से बुजुर्ग को काबू कर उनके हाथ-पैर रस्सी से बांधे गए। दोनों ने करीब एक घंटे तक बातचीत कर बुजुर्ग को शांत किया और पानी पिलाया।
टावर पर चढ़े बुजुर्ग को जब काबू किया गया और उसकी तलाशी ली गई, तो उसके पास से एक डायरी मिली। डायरी में दर्ज जानकारी के मुताबिक बुजुर्ग की पहचान पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर निवासी 70 वर्षीय अंबुज डिगर के रूप में हुई। डायरी में मिले नंबरों पर जब पुलिस ने संपर्क किया। तब पता चला कि बुजुर्ग पिछले सात दिन से लापता हैं और बंगाल में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज की गई है।
पुलिस अधीक्षक का कहना है कि, बुजुर्ग अपनी बेटी को नागपुर के पास छोड़ने आया था। लौटते समय गलत ट्रेन में बैठने के कारण वह पांढुर्ना पहुंच गया। सफर के दौरान उसके पैसे और बैग चोरी हो गया है या फिर गुम हो गया है। इस स्थिति में बुजर्ग मानसिक तनाव के कारण आपा खो बैठा और टावर पर चढ़ गया।
तीन शेर चौक और आसपास की छतों पर इस रेस्क्यू को देखने के लिए हजारों की भीड़ जुटी थी। भीड़ और पुलिस को देखकर बुजुर्ग बार-बार नीचे आने से मना कर देता था। इसलिए पुलिस को कुछ देर के लिए मौके से लोगों को दूर हटाया। आखिरकार सिविल ड्रेस में पहुंचे आरक्षकों ने रस्सियों के सहारे करीब 40 मिनट में उसे सुरक्षित नीचे उतारा। फिलहाल बुजुर्ग को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।