अंशिका की सफलता इसलिए खास हो जाती है क्योंकि उसकी पृष्ठभूमि और उसकी सफलता संघर्ष में दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है...
चित्रकूट. प्रतिभा दुश्वारियों की मार से लड़खड़ा तो सकती है लेकिन मर नहीं सकती। जी हां इस बार के यूपी बोर्ड के हाईस्कूल इंटर परीक्षा परिणाम कुछ ऐसे ही चौंकाने वाले तथ्य सामने ला रहे हैं। शहरी वातावरण की बात छोड़ दें तो ग्रामीण तबके की प्रतिभाओं ने कुछ ज़्यादा ही संख्या में अपना लोहा मनवाया है परीक्षा परिणामों को लेकर। इस बार के परिणाम में बुंदेली धरती के मेधावियों ने कई विषम परिस्थितयों में भी मेहनत की भट्टी में खुद को तपाते हुए उच्च सफलता का मुकाम हांसिल किया है। बुन्देलखण्ड के तीन जनपदों चित्रकूट बांदा व झांसी से इंटरमीडिएट में क्रमशः उमादत्त पटेल, अभिषेक शुक्ला व अभय अग्रवाल ने प्रदेश की टॉप 10 मेरिट में संयुक्त रूप से 6वां स्थान प्राप्त किया है। इसके इतर कई ऐसी प्रतिभाएं निकलकर आ रही हैं जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनकी सफलता में जमीन आसमान का फर्क है, लेकिन मेहनत और हौंसले के दम पर इन प्रतिभाओं ने जमीन और आसमान एक कर दिया।
आमतौर पर सुविधाओं के अभाव में देश व समाज की न जाने कितनी प्रतिभाएं गुमनामी में दम तोड़ देती हैं, लेकिन यही प्रतिभाएं यदि मजबूत इच्छा शक्ति , मेहनत, लगन और सही राह पर चलते हुए खुद को तराशें तो कहीं न कहीं कभी न कभी शायद उन्हें वो रास्ता मिल सकता है जिसकी उन्हें दरकार रहती है। कुछ ऐसा ही सन्देश दिया है जनपद के मानिकपुर तहसील की छात्रा अंशिका ने। अपनी सफलता ने उसने अपने गरीब निरक्षर माता पिता का सिर फक्र से ऊंचा कर दिया है।
अंशिका ने इंटर में किया तहसील टॉप
मानिकपुर तहसील की निवासी अंशिका ने इंटरमीडिएट परीक्षा 2018 के परिणाम में सबको चौंकाते हुए पूरे तहसील में टॉप किया है। वो इंटर साइंस ग्रूप से थी और उसे 84 प्रतिशत अंक मिले हैं। आदर्श इंटर कॉलेज मानिकपुर की छात्रा अंशिका की सफलता ने पूरे क्षेत्र में उसे सराहना का पात्र बना दिया है। उसके शिक्षक भी इस सफलता से अभिभूत हैं।
पिता लगाते हैं मुंगौड़ी का ठेला
अंशिका की सफलता इसलिए खास हो जाती है क्योंकि उसकी पृष्ठभूमि और उसकी सफलता संघर्ष में दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है। अंशिका के माता पिता निरक्षर हैं। पिता लक्ष्मण मानिकपुर बस स्टैंड पर मुंगौड़ी (बुन्देलखण्ड में बनने वाली मूंग की दाल की पकौड़ी) का ठेला लगाकर किसी तरह परिवार का पेट पालते हैं। खून-पसीने की इसी कमाई से उन्होंने बेटी को पढ़ाने की ठानी और आज परिणाम सबके सामने है। मां घर गृहस्थी संभालते हुए बेटी को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। सफलता से उत्साहित अंशिका आईएएस बनकर देश व समाज की सेवा करने की तमन्ना रखती है। पिता का कहना है कि जहां तक हो सकेगा वे अपनी बेटी को पढ़ाएंगे।
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