चित्तौड़गढ़

Rajasthan: एनस्थीसिया डॉक्टर की लगातार 20 घंटे ड्यूटी, फिर कई दिन अस्पताल से गायब, रोस्टर पर सवाल

Doctor Absence Issue: उप जिला चिकित्सालय बेगूं में चिकित्सकों की ड्यूटी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से एक चिकित्सक की लगातार 20 घंटे की ड्यूटी लगाने का मामला सामने आया है।

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Doctor Absence Issue,Chittorgarh
उप जिला चिकित्सालय बेगूं में चिकित्सकों की ड्यूटी रोस्टर को लेकर खड़े हुए सवाल, पत्रिका फोटो

Doctor Absence Issue: उप जिला चिकित्सालय बेगूं में चिकित्सकों की ड्यूटी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से एक चिकित्सक की लगातार 20 घंटे की ड्यूटी लगाने का मामला सामने आया है। इस अजीबोगरीब व्यवस्था ने न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि अस्पताल में आने वाले सैकड़ों मरीजों की सुरक्षा और उपचार व्यवस्था को भी भगवान भरोसे छोड़ दिया है।

जानकारी के अनुसार, उप जिला चिकित्सालय में वरिष्ठ विशेषज्ञ (एनस्थीसिया) डॉ. मनीषा की ड्यूटी लंबे समय से इस प्रकार लगाई जा रही है कि वे सुबह, दोपहर और रात्रि की ड्यूटी एक साथ (लगातार 20 घंटे) पूरी कर लेती हैं। आरोप है कि इस 'सुविधाजनक' रोस्टर के एवज में उन्हें अगले कई दिनों तक अस्पताल में नियमित सेवाएं देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस वीआईपी व्यवस्था के कारण अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक की नियमित उपलब्धता पूरी तरह प्रभावित हो रही है और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

20 घंटे की ड्यूटी: लापरवाही या लाचारी?

स्थानीय लोगों और चिकित्सा जानकारों का कहना है कि आखिर कोई भी चिकित्सक लगातार 20 घंटे तक प्रभावी, मानसिक रूप से सतर्क और एक्टिव रहकर सेवाएं कैसे दे सकता है? यदि चिकित्सक ड्यूटी के दौरान विश्राम करता है, तो यह मरीजों के प्रति लापरवाही है। और यदि वह बिना रुके लगातार कार्य करता है, तो अत्यधिक थकान के कारण मरीजों के ऑपरेशन या उपचार में किसी गंभीर और जानलेवा चूक की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

कलक्टर को सौंपा ज्ञापन

इस पूरे घालमेल को लेकर पूर्व पार्षद जयदीप बिल्लू ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने चित्तौड़गढ़ जिला कलक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और इस मनमानी व्यवस्था को हरी झंडी देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पूर्व पार्षद का कहना है कि यदि चिकित्सक निर्धारित समयानुसार नियमित ड्यूटी दें, तो मरीजों को बेहतर और समय पर उपचार मिल सकता है।

नियमों का रोस्टर या 'सैटिंग' का खेल?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह ड्यूटी रोस्टर चिकित्सा विभाग के नियमों के अनुरूप बनाया गया था या फिर किसी विशेष डॉक्टर को मनचाही छुट्टी और सुविधा देने के उद्देश्य से नियमों को मरोड़ा जा रहा था? यदि लगातार 20 घंटे की ड्यूटी नियमों के विरुद्ध है, तो अस्पताल के ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी या स्थानीय प्रभारी ने इसकी अनुमति किसने दी? और इसकी निगरानी करने वाले उच्च अधिकारी अब तक मौन क्यों रहे?

जिम्मेदार बोले

किसी भी चिकित्सक की लगातार तीन पारियों (20 घंटे) में ड्यूटी लगाना पूरी तरह अनुचित और नियमों के विरुद्ध है। यदि बेगूं अस्पताल में इस तरह की व्यवस्था संचालित हो रही है, तो यह गंभीर मामला है। इसकी तुरंत जांच करवाई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कार्मिकों के खिलाफ आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. ताराचंद गुप्ता, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, चित्तौड़गढ़

इस मामले में पक्ष जानने के लिए अस्पताल प्रभारी से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी तरफ से स्थिति स्पष्ट नहीं की जा सकी।

Published on:
09 Jun 2026 12:00 pm