चित्तौड़गढ़

Rajasthan: पारिवारिक कलह में उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार, पति और दूसरी पत्नी की मौत, जिंदगी से जंग लड़ रही तीसरी पत्नी

शराब का नशा, संपत्ति का शक और बकरियां बेचने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद… सोमवार रात सुवानिया गांव में एक परिवार के लिए तबाही का पैगाम लेकर आया।
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Chittorgarh Double Murder
मृतक भोमली व भगवान लाल। फोटो: पत्रिका

चित्तौड़गढ़। शराब का नशा, संपत्ति का शक और बकरियां बेचने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद… सोमवार रात सुवानिया गांव में एक परिवार के लिए तबाही का पैगाम लेकर आया। पारिवारिक कलह में ऐसी खूनी पटकथा लिखी गई कि गोलियों की गूंज और लड्डु के वार से पूरा परिवार पलभर में बिखर गया। वारदात में पति और उसकी दूसरी पत्नी की जान चली गई, जबकि तीसरी पत्नी जदिंगी और मौत के बीच झूल रही है। कोतवाली क्षेत्र के भेरू सिंहजी का खेड़ा निवासी भगवान लाल कालबेलिया सुवानिया गांव में खेतों की रखवाली करता था।

सोमवार रात भगवान लाल अपनी तीन पत्नियों-लाडू बाई, भोमली व तारा बाई और बच्चों के साथ बैठा था। शराब के नशे में बकरियां बेचने और पैसों के बंटवारे को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। पहली दोनों पत्नियों को शक था कि भगवान लाल संपत्ति और बकरियां बेचकर सारा पैसा हाल ही में घर लाई तीसरी पत्नी तारा को दे रहा है। विवाद इतना बढ़ा कि आपा खो चुके भगवान लाल ने अपनी दुनाली बंदूक से फायर कर दिया। गोली सीधी दूसरी पत्नी भोमली (50) के पेट में जा लगी और वह लहूलुहान होकर गिर पड़ी।

बेटे का आया गुस्सा, पिता पर किया ताबड़तोड़ वार

मां को खून से लथपथ देख भोमली का बेटा अनिल आपे से बाहर हो गया। उसने पास पड़ा लट्ठ उठाया और पिता भगवान लाल तथा तीसरी पत्नी तारा बाई के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। सिर पर गंभीर चोट लगने से पिता वहीं ढेर हो गया, जबकि तारा बाई लहूलुहान होकर अचेत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने भगवान लाल और भोमली को मृत घोषित कर दिया। वहीं, गंभीर घायल तारा बाई को उदयपुर रेफर किया गया है।

बेटा और पहली पत्नी गिरफ्तार

डिप्टी उदयसिंह चुंडावत ने बताया कि हत्या के आरोप में पुत्र अनिल और साजिश में शामिल पहली पत्नी लाडू को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस खूनी संघर्ष ने हंसते-खेलते कुनबे को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। माता-पिता की मौत हो चुकी है, भाई और बड़ी मां सलाखों के पीछे हैं। परिवार में बचे मासूम बच्चे अब बदहवास है और समझ नहीं पा रहे कि एक ही रात में उनका कसूर क्या था। अस्पताल पहुंचे जौहर स्मृति संस्थान के महामंत्री भंवर सिंह खरड़ी बावड़ी ने पीड़ित बच्चों को संभाला और सहयोग का ढांढस बंधाया।

Updated on:
19 Aug 2026 02:29 pm
Published on:
19 Aug 2026 02:29 pm