
खोखी बांध के 2 ब्लॉक टूटे। फोटो: पत्रिका
चित्तौड़गढ़। राजस्थान के झालावाड़, चित्तौड़गढ़ सहित कई जिलों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। रुक-रुककर बरसात हो रही बारिश के चलते कई जगह सड़कें डूब गई और कई कॉलोनियों जलमग्न हो गई। खोखी नदी में आए उफान से चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा क्षेत्र में स्थित खोखी बांध के 7 में से 2 ब्लॉक पूरी तरह टूट गए। बांध के क्षतिग्रस्त होने से 300 बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गईं। वहीं, झालावाड़ जिले में छापी बांध ओवरफ्लो पानी से निचले क्षेत्र की करीब 1000 बीघा फसल चौपट हो गई। बांध के ओवरफ्लो होने से ग्रामीण इलाकों में अफरा-तफरी मच गई।
देवपुरा ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित खोखी बांध के 7 में से 2 ब्लॉक देर रात पूरी तरह टूट गए। जिससे करीब 300 बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गईं। बड़ी बात ये रही कि बांध रात के समय टूटा, जिससे गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। यदि यही घटना दिन के समय होती तो कई किसान खेतों में कृषि कार्य कर रहे होते और बड़ा हादसा हो सकता था।
ग्रामीणों बताया कि रावतभाटा से 65 किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश क्षेत्र से बहती खोखी नदी राणा प्रताप सागर बांध कैचमेंट में मिलती है। साल 2001 में देवपुरा पंचायत की कृषि भूमि सिंचाई के लिए इस नदी पर एक छोटा बांध बनाया गया। पिछले 25 साल से इस बांध की मरम्मत नहीं हुई। ऐसे में इसके तल में धीरे-धीरे छेद होने लगे थे। मंगलवार रात मध्यप्रदेश क्षेत्र में तेज बारिश के बाद नदी में आए उफान से बांध के कुल सात ब्लॉक में से 2 ब्लॉक बह गए। करीब 300 बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गई।
झालावाड़ जिले में स्थित छापी बांध के गेट खोलने में बरती गई लापरवाही के कारण ओवरफ्लो पानी से निचले क्षेत्र की करीब 1000 बीघा फसल चौपट हो गई। बांध के ओवरफ्लो होने से ग्रामीण इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। आक्रोशित किसानों ने मंगलवार को भारतीय किसान संघ के तत्वावधान में प्रदर्शन किया। सूचना पर एसडीएम अकलेरा बांध स्थल पर पहुंचे और किसानों को प्रभावित फसल का सर्वे कराने तथा मामले की जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया।
जानकारी के अनुसार बांध का जलस्तर अधिकतम भराव क्षमता 341 मीटर से 2 मीटर अधिक पहुंच गया था। इसके बावजूद समय रहते सायरन नहीं बजाया गया और गेट नहीं खोले गए। बताया गया कि जनरेटर में डीजल नहीं था। बिजली गुल होने से कर्मचारियों को गेट खोलने में परेशानी हुई। आनन-फानन में 11 गेट एक साथ खोल दिए गए, जबकि दो गेट जाम हो गए। बांध ओवरफ्लो होने से गेटों के ऊपर करीब एक मीटर ऊंचाई तक पानी बहता रहा। एक साथ अधिक संख्या में गेट खोलने के बाद तेज बहाव से खड़ी फसलें, पशु चारा, घरों में रखा लहसुन, गेहूं व अन्य अनाज तथा घरेलू सामान खराब हो गया।
पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में भी वर्षा रुकने के कारण कालीसिंध बांध में पानी की आवक में कमी आई। मंगलवार को बांध के सुबह सात गेट, दोपहर में पांच गेट और शाम होते-होते तीन गेट खोलकर पानी की निकासी की गई। जल संसाधन विभाग के अधिशासी अभियंता सोनू शर्मा ने बताया कि बारिश रुकने से बांध में पानी की आवक धीमी पड़ गई है। मंगलवार शाम तक कालीसिंध बांध के तीन गेट चार मीटर खोलकर करीब 15 हजार 360 क्यूसेक पानी की निकासी की गई।
Updated on:
12 Aug 2026 02:08 pm
Published on:
12 Aug 2026 02:08 pm
