चित्तौड़गढ़

Chittorgarh: अफीम तौल में वसूली का नशा, 1500 की रिश्वत दो, वरना आपकी उपज ‘घटिया’, कैटेगरी के नाम पर खेल

Opium Category Manipulation: बेगूं और रावतभाटा क्षेत्र में अफीम तौल प्रक्रिया अब केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि विवाद और आरोपों का अखाड़ा बन गई है।
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अफीम तौल प्रक्रिया, पत्रिका फोटो
अफीम तौल प्रक्रिया, पत्रिका फोटो

Opium Category Manipulation: बेगूं और रावतभाटा क्षेत्र में अफीम तौल प्रक्रिया अब केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि विवाद और आरोपों का अखाड़ा बन गई है। एक तरफ नारकोटिक्स विभाग व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ हाड़-तोड़ मेहनत कर 'काला सोना' उगाने वाले किसानों ने विभाग के कारिंदों पर भ्रष्टाचार का खुला खेल खेलने का आरोप जड़ा है।

कैटेगरी के नाम पर 'वसूली' का दबाव

किसानों का आरोप है कि तौल केंद्र पर तैनात कुछ अधिकारी और कर्मचारी नई कैटेगरी सिस्टम को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। नियम के मुताबिक अफीम को स्टैंडर्ड, वाटर मिक्स और सस्पेक्टेड श्रेणियों में बांटा गया है।
दर्जनों किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रति किसान 1500 रुपए की रिश्वत मांगी जा रही है। यदि कोई किसान पैसे देने से मना करता है, तो उसकी गुणवत्तापूर्ण अफीम को भी जबरन वाटर मिक्स श्रेणी में डाल दिया जाता है, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

आंकड़ों में भ्रष्टाचार: 75 लाख की बंदरबांट?

बेगूं क्षेत्र में लगभग 6,000 लाइसेंसी अफीम किसान हैं। किसानों का गणित सीधा और चौंकाने वाला है यदि 5,000 किसानों से भी डरा-धमकाकर 1500 रुपए ऐंठे जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर 75 लाख रुपए की काली कमाई का मामला बनता है। किसानों का सवाल है कि इस अवैध वसूली की रकम आखिर किसकी जेब में जा रही है?

120 किमी का सफर और अव्यवस्थाओं की मार

भ्रष्टाचार के साथ-साथ भौगोलिक दूरी ने भी किसानों की कमर तोड़ दी है। बेगूं और रावतभाटा के किसानों को अपनी उपज लेकर 100 से 120 किलोमीटर दूर सींगोली स्थित चारभुजा केंद्र आना पड़ रहा है। चिलचिलाती धूप में लंबी कतारें और ठहरने के नाम पर धर्मशालाओं में अपर्याप्त इंतजामों ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। कई किसान रातभर सड़क किनारे या ट्रैक्टरों में सोने को मजबूर हैं।

प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार

बढ़ते विवाद के बीच जिला अफीम अधिकारी सुशील कुमार वर्मा ने मोर्चा संभालते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा बेगूं क्षेत्र की अफीम की क्वालिटी उत्कृष्ट है। तौल की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी किसान से कोई पैसा नहीं लिया जा रहा। यदि कोई बिचौलिया या कर्मचारी पैसे की मांग करता है, तो किसान डरे नहीं और तुरंत उच्चाधिकारियों को साक्ष्यों के साथ शिकायत करें।

Updated on:
13 Apr 2026 11:06 am
Published on:
13 Apr 2026 11:06 am