चूरू

Churu: दोस्त के साथ लिव-इन में रहती थी पत्नी, पति ने रंजिश में कर दी हत्या, 6 साल बाद कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

Court Ordeer In Murder Case: चूरू के बहुचर्चित ओमप्रकाश हत्याकांड में करीब छह साल बाद अदालत ने पांच आरोपियों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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Jul 23, 2026
Churu Om Prakash Murder Case
AI जनरेटेड फोटो

चूरू जिले के बहुचर्चित ओमप्रकाश हत्याकांड में करीब छह साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सेशन न्यायालय क्रमांक-प्रथम ने हत्या और आपराधिक साजिश के मामले में पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश मुनेश चंद यादव ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, मोबाइल कॉल डिटेल्स और अन्य सबूतों के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी माना। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत सजा के साथ जुर्माना भी लगाया है।

लिव-इन रिश्ते से शुरू हुई रंजिश

अभियोजन के अनुसार मृतक ओमप्रकाश जालोर में निजी नौकरी करता था। इस दौरान उसकी गांव की ही रहने वाली प्रियंका देवी से दोस्ती हो गई। जिसके बाद वह प्रियंका के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था। प्रियंका पहले से विवाहित थी और उसका पति सुरेश कुमार इस रिश्ते का विरोध करता था। इसी बात को लेकर सुरेश और ओमप्रकाश के बीच लंबे समय से रंजिश चल रही थी। पुलिस जांच में सामने आया कि इसी विवाद के चलते ओमप्रकाश की हत्या की साजिश रची गई।

गांव छोड़कर लौटते समय किया पीछा

अभियोजन के अनुसार 2 मई 2020 की रात ओमप्रकाश प्रियंका को उसके गांव छोड़ने गया था। वहां से वापस लौटते समय आरोपियों ने उसका पीछा किया। इसके बाद उसकी हत्या कर शव को भैंसली की रोही में फेंक दिया गया। अगले दिन शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई।

27 गवाह और 106 दस्तावेज बने अहम साक्ष्य

पुलिस अनुसंधान के बाद सुरेश कुमार, राजकुमार उर्फ लिलिया, धर्मेंद्र उर्फ फौजी, अमरसिंह और संजय के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश का आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 27 गवाहों के बयान और 106 दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए। इसके अलावा मोबाइल कॉल डिटेल्स, घटनाक्रम की परिस्थितिजन्य कड़ियां और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को भी अदालत के समक्ष रखा गया। अदालत ने इन सभी साक्ष्यों को मजबूत मानते हुए पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया।

सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा

अपर जिला एवं सेशन न्यायालय क्रमांक-प्रथम ने पांचों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता सलीम खान ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक सुनील जांगिड़ ने अदालत में पक्ष रखा। करीब छह साल बाद आए इस फैसले को पीड़ित पक्ष के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Updated on:
23 Jul 2026 12:56 pm
Published on:
23 Jul 2026 12:56 pm