चूरू

Churu : जिस शहर ने इतिहास गढ़ा, वहीं इतिहास हो रहा जमींदोज

पर्यटन के विकास बात की जाती है लेकिन चूरू तो पहले से पर्यटन का केंद्र रहा है, इसलिए विकास नहीं पहले विरासत के संरक्षण की बात करनी होगी। सरकार और प्रशासन यदि दृढ़ इच्छा शक्ति से विजन तय कर मिशन बना ले तो विरासत बच जाएंगी।
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Jul 20, 2026
heritage havelis of Churu

Churu Heritage : चूरू. छोटी काशी अर्थात थार का बनारस चूरू जहां की हर पुरानी गलियों की विरासतीय धरोहरों में अकूत खजाना छुपा हुआ है। फिर भी इस रत्नगर्भा धरा की विरासत को जमीजोद करने की एक प्रतिस्पर्द्धा से चल पड़ी हैं। कितना विचित्र है कि यहां के रत्नों ने अपने पुरुषार्थ से ऐसी ऐतिहासिक धरोहरे खड़ी की जो आज अपने संरक्षण के लिए नव संतति की ओर टुकर टुकर देखी है।

फिर भी स्थापत्य कला के वृत चित्रों को ढ़हाने में वर्तमान को कोई गुरेज तक नहीं है, जबकि यह हेरिटेज सिटी है तो पर्यटन के मानचित्र पर अंकित है फिर भी यहां की हवेलिया, देवलिया, छतरिया का नामोनिशां मिटाने पर माफिया तुले हुए है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन मौन साधना में रत है।

नहीं रही बागला की हवेली
राजस्थान के पहले करोड़पति माने जाने वाले बागला की हवेली (Bagla Ki haveli) तक काल के गाल में समा गई तो अन्य हवेलियों की तो बिसात ही क्या हैं क्योंकि भगवानदास बागला का चूरू के विकास में बड़ा योगदान रहा है। उनके राजकीय बागलाउ. मा. वि. ने अनेक ऐसे युवा तैयार किए जो आज उद्योग, चिकित्सा, शिक्षा से लेकर राजनीति में देश प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। फिर भी उनकी विरासत का जमींजोद होना आश्चर्यचिकित कर देने वाली घटना है।

कई हवेलियां टूटी ढह गई छतरी
हवेलियों की हेरिटेज सिटी (Heritage City) की विरासत की यदि बात करें और राज्य सरकार यहां के अकूत खजाने को खोजे तो उसकी आंखे फटी रह जाएंगी। हालांकि यहां छुपे रत्नों की चूरू की युवा पीढ़ी को भी शायद ही पता है तो उन्हें यहां की भित्ति चित्र युक्त हवेलियों को दिखाने का शायद ही कभी प्रयास हुआ है। तभी तो कई हवेलियां टूट रही हैं, छतरी गिराकर जमीन सपाट कर दी गई है। इतना ही नहीं आजादी से पहले कई राजे महाराजाओं को ऋण देनेवाले चूरू के मिर्जामलपौद्दार की हवेली तक बिक चुकी है। हवेलियां बिक रही हैं, खंडित हो रही हैं, किसी को ग्राहक का इंतजार है तो किसी पर ग्राहक की नजर टिकी हुई है।

पर्यटन विकास की केवल बातें
राज्य सरकार ने पर्यटन विकास के लिए बजट प्रस्ताव भी रखा। फिर भी पर्यटन और विकास के बीच बनी गहरी खाई को पाटने का कोई सकारात्मक प्रयास नहीं हुआ है। यहां के वरिष्ठजन कहते हैं कि जब तक हवेलियों के वारिसों से संवाद नहीं होगा, उन्हें अपनी हवेलियों के उपयोगिता और इसके विकास पर बात नहीं होगी या फिर सरकार और प्रशासन प्रयास नहीं करेगा तब तक हवेलिया, स्थापत्यकला और भित्ति चित्र यूं ही मिट्टी में मिलते रहेंगे।

इनका कहना है
चूरू के बागला की हवेली का निशां मिटना, पोद्दार घराने सहित कई हवेलियों का बिकना वास्तव में हेरिटेज सिटी के लिए किसी गहरे आघात से कम नहीं है। पर्यटन के विकास बात की जाती है लेकिन चूरू तो पहले से पर्यटन का केंद्र रहा है, इसलिए विकास नहीं पहले विरासत के संरक्षण की बात करनी होगी। सरकार और प्रशासन यदि दृढ़ इच्छा शक्ति से विजन तय कर मिशन बना ले तो विरासत बच जाएंगी। विरासत बचेगी तो विकास अपनी राह भी बना लेगा।

Updated on:
20 Jul 2026 12:49 pm
Published on:
20 Jul 2026 12:49 pm