चूरू़. एक वह भी दौर था जब वर्तमान जैसे वाहन नहीं हुआ करते थे, तांगा, बैल, ऊंट गाड़ी हुआ करती थी लेकिन चूरू हमेशा से ही कर्मवीरों की भूमि रही है। छोटी काशी चूरू नवाचार का केन्द्र रहा है वह भी उस जमाने में हुआ करते थे जब कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। उसी दौर में चूरू में इजाद हुई बकरा गाड़ी, जिसे बकरा बग्घी भी कहा जाता है।